प्रकृति की अनुपम छवि है नारी,
सहनशील वसुंधरा, चंदा सी उजियारी
शारदा की वीणा, मां दुर्गा की कटारी,
मैं अवतारी हूं, हां मैं नारी हूं ।
उपवन की शोभा फुलवारी,
बिन नारी दांपत्य अधूरी ।
परिवार की धूरी नारी ,
मैं अवतारी हूं, हां मैं नारी हूं।
शुभ घड़ी की वादन शहनाई,
वेद – ऋचा को रचने वाली ।
चूड़ियां को शस्त्र बना खानकाई,
मैं अवतारी हूं, हां मैं नारी हूं।
त्रिलोक स्वामी की जन्मदात्री,
मैं अबला नहीं अवतारी हूं।
आंखों पर पट्टी बांधी गांधारी,
मैं अवतारी हूं, हां मैं नारी हूं।
चीरहरण पर मैं चित्कारी,
खुले बाल महाभारत करवाई।
रणचंडी बन रणभेरी बजाई,
मैं अवतारी हूं, हां मैं नारी हूं।
श्मशान में आंचल फाड़ी,
दृढ़ता से यमराज पर भारी।
नारी धर्म को वन स्वीकारी,
मैं अवतारी हूं, हां मैं नारी हूं।
रणक्षेत्र में कर घुड़सवारी,
गोरों को धूल चटाई लक्ष्मीबाई हूं।
राष्ट्रधर्म के लिए अपना जीवन वारी,
मैं अवतारी हूं, हां मैं नारी हूं।
ब्यूटी कुमारी
प्रधान शिक्षक
दलसिंहसराय,
समस्तीपुर
