पद्यपंकज Uncategorized मां की याद सताती है -मनु कुमारी

मां की याद सताती है -मनु कुमारी



मां की याद सताती है

गर्भकाल से हीं जो हमपर ममता प्रेम लुटाती है,
स्वस्थ काया को मेरे खातिर ,रोगग्रस्त कर जाती है ।
मेरे सुरक्षा के कारण वो, हरपल देव मनाती हैं।
इसलिए हर सुख – दुख में बस
मां की याद सताती है।

जिह्वा- स्वाद को भूल के वह,
उबला खाकर रह जाती है।
स्वयं जागके गीले कपड़ों में,
सूखे में हमें सुलाती है।
कोमल भावों से सेती वो
हर पल बस स्नेह लुटाती है।
इसलिए तो हर सुख – दुख में मां की याद सताती है।

अपनी बांहों में भरकर जब ,लोरी रातों में गाती है।
परीलोक की कथा सुनाकर, जन्नत की सैर कराती है।
मैं रूठूं जब भी बार – बार,
वो प्यार से हमें मनाती हैं।
इसलिए हर दुख – सुख में बस मां की याद सताती है।

पढ़ना- लिखना आगे बढ़ना, संस्कृति- संस्कार सिखाती है।
जब बात मेरी रक्षा की हो तब,
सिंहों से लड़ जाती है।
सत्य, त्याग, संयम, धीरज संग,
हमें नैतिक पाठ पढ़ाती है ।
इसलिए हर दुख – सुख में बस मां की याद सताती है।

सदाचार शुभकर्म कराती ,
स्वावलंबी हमें बनाती है।
मेहनत,लगन, संघर्ष की गाथा
अनुभव से कह जाती है।
क्रोध दमन का मौन अस्त्र है
यही जीवन का मर्म बताती है।
इसलिए तो हर सुख-दुख में मां की याद सताती है।

संतान की साड़ी पीड़ा को,
मां तत्क्षण हीं हर लेती है।
जब मन पर पाप का बोझ भी हो,
सिर को फिर सहला देती हैं।
संतानों की हर भूल – चूक पर
दया करूणा दिखलाती है।
इसलिए तो हर सुख-दुख में मां की याद सताती है।

आए लाख मुसीबत हमपर तो,
वो स्वयं ढाल बन जाती है।
मौत की छाया भी टल जाए,
जब गोदी में हमें सुलाती है।
जीवन की धूप में जलूं अगर,
छाया ममता की लाती है।
इसलिए तो हर सुख-दुख में मां की याद सताती है।

स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी,राघोपुर

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