मातु अम्बे आ रही।
सौम्यता दिखला रही।।
भक्त को खुशियाँ मिली।
दुष्ट को दहला रही।।
रात्रि नौ मधुमास की।
दिव्यता बरसा रही।।
दिव्य लेकर रूप नौ।
शक्ति रूपा भा रही।।
थाल हाथों में लिए।
नारियाँ बतला रही।।
वर्ष नव प्रारंभ हो।
गीत मंगल गा रही।।
शैलपुत्री मातु से।
सिद्धिदात्री छा रही।।
लाल चुनरी संग में।
लालिमा छितरा रही।।
अंश उनकी नारियाँ।
मातु बन दिखला रही।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- 9835232978
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