शिव शंभू अविनाशी,
कहलाते जो कैलाशी,
घट-घट के हैं वासी, पार्वती के साथ जी।
बेलपत्र पर रीझे,
भक्तों से कभी न खीझे,
काल दुष्ट सब सीझे, मेरे भोलेनाथ जी।
जटा जूट धर गंग,
भस्म रमाए मलंग,
गले लिपटे भुजंग, नवाऊँ मैं माथ जी।
सकल सृष्टि के स्वामी,
प्रभु तुम अंतर्यामी,
हूँ मूरख खल कामी, रखो सिर हाथ जी।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- 9835232978
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