नये साल कि ये नयी उम्मीदें – रवि कुमार
नए साल में नई उमंगे, फिर से रौशनी ले आए हैं।
उम्मीदों कि ये किरणे, सपनों के बागों में फूल सजाये हैं ।।
अब शुरुआत करनी है एक नई राह ।
जिसमें चुनौतियों को स्वीकार करने कि है चाह ।।
बीते साल जो रह गया था बाकि एक सपना ।
नए वर्ष में जोश के साथ करना है उसको अपना ।।
जो कसर रह गया था बाकी उसको सुधारनी है ।
गलतियों से सिखकर, रचनी एक कहानी है ।।
शुरुआत नई होगी, नए होंगे वो जज्बे सारे ।
किताबों पर जमी धूल, हटाते लगते बड़े न्यारे ।।
आओ मिलकर करें हम सभी एक वादा ।
इस नए वर्ष में खुद पर करेंगे काम ज्यादा ।।
पँखों को खोल भरनी है अभी हमें ऊँची उड़ाने ।
तभी हम सब ला सकेंगे अपने लिए खूबसूरत जमानें ।।
नए साल में नई उमंगे, फिर से रौशनी ले आए हैं।
उम्मीदों कि ये किरणे, सपनों के बागों में फूल सजाये हैं ।।
लेखक – रवि कुमार
विद्यालय – कन्या उत्क्रमित मध्य विद्यालय, मसाढ़ ( उदवंतनगर, भोजपुर )
