Amarnath Trivedi

प्रभु हम तुम्हें भुला न पाएँ – अमरनाथ त्रिवेदीप्रभु हम तुम्हें भुला न पाएँ – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 9:44 pm

प्रभु हम तुम्हें भुला न पाएँ सारी    उमरिया   जीवन   की , प्रभुजी  यूँ  ही  बीत   न जाए , कण कण[...]

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गुरुवर वाले प्रेम से – अवतार छंद गीतिका- राम किशोर पाठकगुरुवर वाले प्रेम से – अवतार छंद गीतिका- राम किशोर पाठक

0 Comments 9:42 pm

गुरुवर वाले प्रेम से – अवतार छंद गीतिका झूम रहे सब संग में, कुछ आज कीजिए। गुरुवर वाले प्रेम से,[...]

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Amarnath Trivedi

हे रामभक्त अंजनी नंदन- अमरनाथ त्रिवेदीहे रामभक्त अंजनी नंदन- अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 4:45 am

हे रामभक्त अंजनी नंदन हे रामभक्त   अंजनी  नंदन । हे अमित बल के तू निधान । तुम्हीं   तो   दुखहर्त्ता [...]

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घट-घट वासी शिव संन्यासी – सरसी छंद गीत – राम किशोर पाठकघट-घट वासी शिव संन्यासी – सरसी छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 4:42 am

घट-घट वासी शिव संन्यासी – सरसी छंद गीत बैठे हैं भस्म लगा कैलाशी, करते बेड़ा पार। घट-घट वासी शिव संन्यासी,[...]

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समय – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान ‘समय – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान ‘

0 Comments 4:41 am

समय/काल दोहे समय नहीं है छोड़ता,चाहे हो बलवान। युग आए ठहरे नहीं,थोड़े दिन की शान।। समय परख सज्जन चले,दुर्जन खोए[...]

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Amarnath Trivedi

बरसात और संयम – अमरनाथ त्रिवेदीबरसात और संयम – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 9:45 pm

बरसात और संयम सावन भादो बरसे पानी , बादल खूब करे मनमानी । खेतों में खूब पानी लगता , किसानों[...]

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बारिश संग स्वास्थ्य – राम किशोर पाठकबारिश संग स्वास्थ्य – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:42 pm

बारिश संग स्वास्थ्य जब-जब भी बारिश आती है। संग समस्या भी लाती है।। ताल-तलैया भर जाते हैं। धूल‌ मार कीचड़[...]

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Amarnath Trivedi

बारिश और स्वास्थ्य – अमरनाथ त्रिवेदीबारिश और स्वास्थ्य – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 9:40 pm

बारिश और स्वास्थ्य बारिश का मौसम आ गया अब सुहाना , बरसता है   पानी ,   बरसता   फसाना । जिधर  देखें [...]

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सपने लेकर वर्षा आई- गीतिका – राम किशोर पाठकसपने लेकर वर्षा आई- गीतिका – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:38 pm

सपने लेकर वर्षा आई- गीतिका सपने लेकर वर्षा आई। जीवन की बगिया मुस्काई।। हरी चुनरिया ओढ़ी धरती। तरुवर में आई[...]

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Jainendra

मोबाइल की लत- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मोबाइल की लत- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 8:44 pm

बाल सृजन मनहरण घनाक्षरी छंद में हर दम रख साथ, जागते हैं दिन रात, बच्चों को मोबाइल का, विकल्प सुझाइए।[...]

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