मीठी बोली। कोयल के लिए स्वर,अनमोल सरोवर, डूबने को हर लोग,चाहते हैं दिन-रात। काक काला लिए रंग,कंठस्थ है स्वरभंग, करते[...]
वंदनवार सजे शारदा – रामपाल प्रसाद सिंहवंदनवार सजे शारदा – रामपाल प्रसाद सिंह
वंदनवार सजे शारदा शोर हुआ अब कानन में। मदिरा सवैया भोर हुई उठ जा प्रिय जीवन, बोल रही कोयल वन[...]
रामायण पढ़ते हैं – राम किशोर पाठकरामायण पढ़ते हैं – राम किशोर पाठक
गीतआओ चिंतन कर लें थोड़ा, जो खुद गढ़ते हैं।गाथा सुंदर रामायण की, हम-सब पढ़ते हैं।। आओ चिंतन कर लें थोड़ा,[...]
मेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमारमेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमार
मेरी पोषण वाली थाली : बाल कवितामाँ ने सजाये थाली में अनोखे रंग ,पोषण थाली अब करेगी कुपोषण से जंग[...]
कैसे कह दूं – बैकुंठ बिहारीकैसे कह दूं – बैकुंठ बिहारी
कैसे कह दूंकैसे कह दूं कि सब ठीक है,अजीब सी बेचैनी है।कैसे कह दूं कि सब ठीक है,अजीब सा अधूरापन[...]
रामायण – राम किशोर पाठक रामायण – राम किशोर पाठक
आओ चिंतन कर लें थोड़ा, जो खुद गढ़ते हैं। गाथा सुंदर रामायण की, हम-सब पढ़ते हैं।। नारायण होकर जब नर[...]
यूँ ही लम्हें बीत जाएँगे – अमरनाथ त्रिवेदीयूँ ही लम्हें बीत जाएँगे – अमरनाथ त्रिवेदी
यूँ ही लम्हें बीत जाएँगे , न हम रहेंगे न तुम रहोगे फिर अपनी बात कहाँ और किसको कहोगे ? यह अंतहीन सिलसिला [...]
हेलो अक्टूबर अवधेश कुमारहेलो अक्टूबर अवधेश कुमार
हेलो अक्टूबर : मेरे बगीचे से : बाल कविता अक्टूबर आया लेकर मौसम सुहाना सा, सूरज मृदु , नभ नीला[...]
चरणों की भक्ति -जैनेन्द्र प्रसाद रविचरणों की भक्ति -जैनेन्द्र प्रसाद रवि
चरणों की भक्ति रूप घनाक्षरी छंद दानवों का दुनिया में अत्याचार बढ़ा जब, धरा की पुकार सुन, लिया तब अवतार।[...]
दीप जलाना कर्म है रामकिशोर पाठकदीप जलाना कर्म है रामकिशोर पाठक
दीप जलाना कर्म है – दोहा छंद गीत तिमिर घना कितना यहाँ, इसका करें न ध्यान। दीप जलाना कर्म है,[...]
