३ दिसंबर १८८४, बिहार की माटी में जन्म हुआ। ज्ञान, सत्य, सेवा का दीप, नवयुग का प्रकाश दीप्त हुआ। बाल्यकाल[...]
शीर्षक: निरख सुहानी भोर- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’ विधा- मनहरण घनाक्षरीशीर्षक: निरख सुहानी भोर- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’ विधा- मनहरण घनाक्षरी
निरख सुहानी भोर, सुखद विहंग शोर, प्राणवायु का सहर्ष, अनुभव कीजिए। ललित प्राची की लाली, भृंगी बाग मतवाली, भीनी गंध[...]
प्रकृति का संदेश- सुरेश कुमार गौरवप्रकृति का संदेश- सुरेश कुमार गौरव
हरी-भरी यह धरती अपनी, इसको हमें बचाना है। पेड़ लगाकर, जल बचाकर, हरियाली फैलाना है॥ नदियाँ बहें सदा निर्मल-सी, कलुष[...]
चंद्रशेखर आजाद – रामकिशोर पाठकचंद्रशेखर आजाद – रामकिशोर पाठक
भारत है वीरों की धरती, आओं मिलें आजाद से। अंग्रेज सदा काँपा करते, जिनके हीं शंखनाद से। ब्राह्मण कुल का[...]
शिवरात्रि विशेष दोहावली- रामकिशोर पाठकशिवरात्रि विशेष दोहावली- रामकिशोर पाठक
प्रकृति वधू का रूप ले, पुलकित रही निहार। पुरुष प्रकृति का है मिलन, मन में लिए विचार।। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी,[...]
दोहावली – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’
गिरिजापति भूतेश शिव, आया हूँ दरबार। विनती बारंबार है, करिए बेड़ा पार।। अंतक अक्षय आप हो, उमापति विश्वनाथ। नीलकंठ शिवमय[...]
प्रकृति – रत्ना प्रियाप्रकृति – रत्ना प्रिया
नित्य कर्मरत रहती प्रकृति, तब जग सुंदर हो पाता है। जग में वही सफल हो पाता जिसे परिश्रम भाता है।।[...]
सच में जीवन जीना सीखें – अमरनाथ त्रिवेदीसच में जीवन जीना सीखें – अमरनाथ त्रिवेदी
रोते को हँसाना सीखें, जग में नाम कमाना सीखें। कभी न झगड़ा झंझट करें, दिल खुशियों से भरा करें। मन से दुख[...]
मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठकमनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक
आधार का वर्ग मान, लंब का भी वर्ग ज्ञान, दोनों के योगफल को, ज्ञात कर लाइए। तीसरी भुजा कर्ण लें,[...]
कबीर फिर ना आना इस देश- अवनीश कुमारकबीर फिर ना आना इस देश- अवनीश कुमार
रंजिशे बढ़ने लगी है अब इस देश में बात-बात में धार्मिक उन्माद का आतंक दिखने लगा है अब इस देश[...]
