विश्व पर्यावरण दिवस- कुण्डलिया चिंतन हरदम हम करें,तभी मिलेंगे त्राण। लिए दिवस पर्यावरण,चलें बचाने प्राण।। चले बचाने प्राण,जिंदगी पावन कर[...]
आओ पेड़ लगाएँ हम – रत्ना प्रियाआओ पेड़ लगाएँ हम – रत्ना प्रिया
आओ पेड़ लगाएँ हम पर्यावरण शुद्ध रखना है तो, आओ पेड़ लगाएँ हम । धरती के सूने आँचल में, हरियाली[...]
पर्यावरण की समस्या और निदान – अमरनाथ त्रिवेदीपर्यावरण की समस्या और निदान – अमरनाथ त्रिवेदी
पर्यावरण की समस्या और निदान पर्यावरण की बिगड़ती सूरत , बड़ी समस्या बनी आज की है । कैसे इसे पटरी[...]
धरती की पुकार – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’धरती की पुकार – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
धरती की पुकार बचपन ने जहाँ देखा खेतों- खलिहानों को, आज वहीं देख रहें उगते हुए मकानों को। हवा में[...]
अंग्रेजी भाषा में शिक्षण की सार्थकता – अमरनाथ त्रिवेदीअंग्रेजी भाषा में शिक्षण की सार्थकता – अमरनाथ त्रिवेदी
अंग्रेजी भाषा में शिक्षण की सार्थकता विश्वव्यापी अंग्रेजी भाषा का , कभी हम दरकिनार नहीं कर सकते । शिक्षण कार्य में[...]
मौसम का रुख गया बदल- भूषण छंद गीत – राम किशोर पाठकमौसम का रुख गया बदल- भूषण छंद गीत – राम किशोर पाठक
मौसम का रुख बदल रहा – भूषण छंद गीत सबको विचार करना यह, एक साथ है मिलजुल कर। मौसम का[...]
भाषा शिक्षण में अंग्रेजी का महत्व – ताटंक छंद गीत – राम किशोर पाठकभाषा शिक्षण में अंग्रेजी का महत्व – ताटंक छंद गीत – राम किशोर पाठक
भाषा शिक्षण में अंग्रेजी का महत्व- ताटंक छंद गीत भाषा चाहे कोई भी हो, वह संपर्क बनाती है। हृदय भाव[...]
क्या मैं अबोध हूॅं – राम किशोर पाठकक्या मैं अबोध हूॅं – राम किशोर पाठक
क्या मैं अबोध हूॅं। माँ सुनो तो, एक बात जरा, क्या मैं अबोध हूॅं ? पाँच वर्ष की हो गयी,[...]
बचपन – रूचिकाबचपन – रूचिका
बचपन बगीचे में नही जाता बचपन, बागों की दौड़ नही लगाता बचपन, मोबाईल की दुनिया में देखो कैसे अब गुम[...]
बहुत गरम हुए सूरज दादा- अमरनाथ त्रिवेदीबहुत गरम हुए सूरज दादा- अमरनाथ त्रिवेदी
बहुत गरम हुए सूरज दादा बहुत गरम हुए सूरज दादा, कोई उन्हें समझाए न। कैसे हमारे दिन कटेंगे, कोई उन्हें[...]
