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मनहरण घनाक्षरी:- एस. के. पूनममनहरण घनाक्षरी:- एस. के. पूनम

0 Comments 6:25 pm

शीर्षक: कभी रथ खींचिए मंदिर की ओर चलें, मिलेगी जीने की राह, जय बोलो जगन्नाथ, नमन तो कीजिए। हजारों हैं[...]

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Jainendra Prasad Ravi

विधा- रूप घनाक्षरी: जैनेन्द्र प्रसाद रविविधा- रूप घनाक्षरी: जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 5:33 am

किसान “”””””””””””””””” फसल बोने के पूर्व, खेतों की जुताई हेतु, सुबह ही चल देते, हल बैल ले के संग। हरियाली[...]

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Girindra Mohan Jha

खुद मनुष्य बन, औरों को मनुष्य बनाओ- गिरीन्द्र मोहन झाखुद मनुष्य बन, औरों को मनुष्य बनाओ- गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 5:57 pm

सदा कर्मनिष्ठ, सच्चरित्र, आत्मनिर्भर बनो तुम, जिस काम को करो तुम, उससे प्रेम करो तुम। नित नई ऊँचाई छूकर, सदा[...]

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स्वर्ग और नर्क की कल्पना – नीतू रानीस्वर्ग और नर्क की कल्पना – नीतू रानी

0 Comments 10:49 pm

स्वर्ग नरक कहीं और नहीं है इसी पृथ्वी पर सब। जरा सोचिए बैठकर, समय मिले एक पल तब।। इसी पृथ्वी[...]

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Jainendra

कभी घबराना नहीं – जैनेन्द्र प्रसाद रविकभी घबराना नहीं – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 5:44 pm

रूप घनाक्षरी छंद तूफानों में नाव डोले, कभी खाए हिचकोले, धारा बीच माँझी चले, थाम कर पतवार। अवसर आने पर,[...]

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Nitu Rani

स्वर्ग नर्क कहीं और नहीं- नीतू रानीस्वर्ग नर्क कहीं और नहीं- नीतू रानी

0 Comments 5:36 pm

स्वर्ग नरक कहीं और नहीं है इसी पृथ्वी पर सब, बैठके थोड़ा सोचिए जब समय मिलता है तब। इसी पृथ्वी[...]

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Girindra Mohan Jha

भारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झाभारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 5:33 pm

वेद-वेदान्त की है उक्ति यही, सदा बनो निर्भीक, कहो सोsहं , उपनिषद कहते हैं, ‘तत्त्वमसि’, तुम में ही है ‘ब्रह्म’,[...]

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Girindra Mohan Jha

सागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झासागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 6:04 pm

सागर ने नदी से कहा- सरिते! लोग कहते हैं, तुम नदी समान बनो, चलो, निरंतर चलो, विघ्नों को लाँघकर, अनवरत[...]

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