जीवन के कई रंग, लोग यहां लड़ें जंग, ठंड से ठिठुरे, नहीं चादर है पास में। कोई नहीं देखे अभी,[...]
अतुल्य टीका- सुरेश कुमार गौरवअतुल्य टीका- सुरेश कुमार गौरव
सदियों पूर्व की गई अपने यहां “टीकाओं” की अनूठी शुरुआत एक से बढ़कर एक हुए विद्वजन किए अद्भुत संस्कृति की[...]
ठुठरती ठंड- जयकृष्णा पासवानठुठरती ठंड- जयकृष्णा पासवान
गगन में कोहरे छाऐ हुए, बादल की छलकती है शमा। जग-सारा विरान हो गए, ठुठरती ठंड की है पनाह ।।[...]
बाल मन- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बाल मन- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बिस्किट मिठाई केक, नौनिहालों को भाते हैं, जहाँ हों खिलौने-टॉफी, आंखें उसी ओर हैं। कोई भी मौसम रहे, खुशियों की[...]
जंगल में विद्यालय- रणजीत कुशवाहाजंगल में विद्यालय- रणजीत कुशवाहा
शिक्षा बना बाजारवाद का आलय। जंगल में खुला ग्लोबल विद्यालय।। जब जंगल में विद्यालय खुला। प्रचार प्रसार खुब जमके हुआ।।[...]
वर्षा रानी- रणजीत कुशवाहावर्षा रानी- रणजीत कुशवाहा
खुब बरसों प्यारी वर्षा रानी। पग-पग कर दो पानी-पानी।। बादलों से मोरों को नचा ओ। मेंढक की टर्र – टर्र[...]
पुस्तक- सुरेश कुमार गौरवपुस्तक- सुरेश कुमार गौरव
जीवन मित्र है हर अच्छी पुस्तक जीवन मार्ग में देती है ये दस्तक. भाषा का मर्म भी छिपा है इसमें,[...]
शीत का भरण है- एस.के.पूनमशीत का भरण है- एस.के.पूनम
विद्या:-मनहरण घनाक्षरी ठंडी-ठंडी हवा चली, शीत यहाँ खूब पली, आलाव है जल पड़ी,ठंड में शरण है। अंशु-अंशु कह पड़ा, करबद्ध[...]
पक्षियों की भाषा और जीवन गान- सुरेश कुमार गौरवपक्षियों की भाषा और जीवन गान- सुरेश कुमार गौरव
पक्षियों की भाषा भी बड़ी सुरमयी सी होती हैं! इनके कलरव बोल से मन गीतमयी सी होती हैं!! कभी इस[...]
प्रकृति और मनुष्य- रणजीत कुशवाहाप्रकृति और मनुष्य- रणजीत कुशवाहा
प्रकृति है जीवन का आधार। मनुष्य ने किया इससे खिलवाड़।। गगनचुंबी इमारत की जाल बिछाई। धरा पर कंक्रीट रुपी जंगल[...]
