वर्तमान में पक्षी जगत की गौरैया अब विलुप्ति के कगार पर है। कहां चली गई कभी मेरे घर की मुंडेर[...]
नवांकुर पौधा- सुरेश कुमार गौरवनवांकुर पौधा- सुरेश कुमार गौरव
नवांकुर पौधा इसके उपर रंग-बिरंगे सुंदर फूल खिले, बैठे खगों के सुंदर मीठे स्वर वातावरण में मिश्री घोले। कोंपल से[...]
मौसम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद रोज दिन पल-पल, मौसम बदल रहा, सेंकने को मन करे, बैठ खिली धूप को। जो रहेंगे सावधान,[...]
अन्नदाता -सुरेश कुमार गौरवअन्नदाता -सुरेश कुमार गौरव
भारतीय किसान जाड़ा,गर्मी,बरसात सभी मौसमों की मार झेलते हुए ,फसलों के नुक़सान का भी दर्द झेलते हुए सदा अन्नदाता के[...]
गीतिका – सुधीर कुमारगीतिका – सुधीर कुमार
गीत छंद – गीतिका मात्रा — १४ २१२२ २१२२ , २१२२ २१२२ छोड़ दो तकरार सारे , प्रेम से कुछ[...]
हवा में वासंतिक महक- सुरेश कुमार गौरवहवा में वासंतिक महक- सुरेश कुमार गौरव
खिल उठते चहुंओर फूल, सुंदर महक पलाश के प्रकृति ने फगुई फाल्गुन को,खूब लाया तलाश के। प्रेम यौवन का मधुमास,[...]
हमारा मुल्क- जयकृष्णा पासवानहमारा मुल्क- जयकृष्णा पासवान
सोना था सोनाली कितनी, मुल्क हमारा परम निशान। देश में आकर बिखर गया, अंग्रेजी शासन का ऐलान।। सब भेदों से[...]
सरस्वती वन्दना- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’सरस्वती वन्दना- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
दे विमल बुद्धि भावना, माँ शारदे है प्रार्थना , ऐसी शक्ति दे मां कर सकूं, हर संकटों का सामना। बालक[...]
चलो गणतंत्र मनाते हैं- रूचिकाचलो गणतंत्र मनाते हैं- रूचिका
चलो एक बार फिर जश्न मनाते हैं, आज़ादी का मंत्र और नियमों का है तंत्र गणतंत्र मनाते हैं। राजनीति पर[...]
भारत गान – सुरेश कुमार गौरवभारत गान – सुरेश कुमार गौरव
सबसे प्यारा और न्यारा अपना जग में हिंदुस्तान! “सत्यमेव जयते” से है, इसकी जग में पहचान!! “सर्वधर्म समभाव” का है,[...]
