मुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठक

अम्मा कुछ मुझको बतलाओ। मुझको कान्हा आज बनाओ। जो चाहूँ वह दे दो मुझको। ऐसे कभी नहीं तड़पाओ।। मैं भी मुरली बजा सकूँगा। मुरली तो मुझको दिलवाओ।। साँपों का फन…

ग्रामीण परिवेश-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

सुबह सवेरे जाग,  कबूतर और काग,  धूप सेकने को बैठी, पक्षियांँ मुंडेर पर। फसलें खेतों से जब  किसानों के घर आए, पड़ते नजर झूमे, अनाजों के ढेर पर। काम से…

पुकारिए उसे सदा रामकिशोर पाठक

पुकारिए उसे सदा – पंचचामर/नराच/नागराज छंद गीत १२१-२१२-१२१-२१२-१२१-२ लखे कभी विकार तो, सवाल जो तजा करे। पुकारिए उसे सदा, विचार शुद्ध जो भरे।। सखा किसे कहें यहाँ, सवाल आज है…

होकर मगन -रामपाल प्रसाद सिंह

होकर मगन गगन के नीचे, दौड़ रहे ये बच्चे हैं। जिन्हें देखकर वयोवृद्ध सब,अंतर मन से नच्चे हैं।। हरियाली के बीच निरंतर,कोयल की मीठी बोली, विहग सरीखे उड़ते जो हैं,डाल…