धनतरेस रामकिशोर पाठक

धनतेरस – मनहरण घनाक्षरी धनतेरस है आया, लेकर धन की माया, बाजार धूम मचाया, हाट गुलजार है। करना है दीप-दान, यम को देते सम्मान, पूजन विधि विधान, सुंदर त्यौहार है।…

धनतरेस -रामपाल प्रसाद सिंह

धनतेरस। रोला छंद । पावन कार्तिक मास,स्वर्ग से सुंदर भाता। त्रयोदशी का योग,कृष्ण पक्ष अति सुहाता। प्रकट हुए धनदेव, ग्रंथ आदिम कहते हैं। देते शुभ सम्मान,सदा साधक रहते हैं।। धनतेरस…

मिलकर दीप जलाएँ – बाल गीत

मिलकर दीप जलाएँ – बाल गीत आओ खुशी मनाएँ। मिलकर दीप जलाएँ।। घना अँधेरा छाया। धन्य अमावस आया।। कहते सभी दिवाली। इसकी कथा निराली।। बच्चे हर्षित गाएँ। मिलकर दीप जलाएँ।।०१।।…

पानी – गिरींद्र मोहन झा

पानी तू रंगहीन होती, फिर भी तेरे रंग अनेक,श्रेष्ठ विलायक बनकर तू कितनों को करती एक,आंखों का पानी, हो सबके आंखों में थोड़ा पानी,ऐसा कृत्य न कर कि होना पड़े…

तुमसे लगन लगी -जैनेंद्र प्रसाद रवि

तुमसे लगन लगी ग्वाल-बाल संग मिल, गोपियों के घर जाते, आदत थी छिपकर, माखन चुराने की। गांव की ग्वालन जातीं, यमुना के तीर जब, कदंब पे चढ़कर, वसन छिपाने की।…

दिवाली – नीतू रानी

दिवाली। -सादगी से दिवाली। आओ बच्चों चलो मनाने मिलकर हम सब दिवाली, आएँगी सज-धज कर घर में डोली पर बैठकर माँ काली। दीपों से हम घर को सजाएँगे मधुर से…