कैसे आए शांति -रामकिशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

कैसे आए शांति- सरसी छंद गीत

गद्दारों की फौज खड़ी हैं, जो फैलाती भ्रांति।
विकट समस्या आज जगत् की, आए कैसे शांति।।

सभी जहाँ हैं सीना तानें, बनता खुद सिरमौर।
अपनी करनी सही बताता, सुनें नहीं कुछ और।।
आज लगी है धूमिल पड़ने, मानवता की कांति।
विकट समस्या आज जगत् की, आए कैसे शांति।।०१।।

बरस रहें अंगारे अब तो, हर-पल जैसे जंग।
कुत्सिकता ने डेरा डाला, जन मानस है दंग।।
प्रज्ञा जैसे नष्ट हुई है, सत वाणी में क्लांति।
विकट समस्या आज जगत् की, आए कैसे शांति।।०२।।

प्रेम हारकर अहंकार से, छीन लिया सुख चैन।
एक अलग सा भय है सबमें, दिन हो चाहे रैन।।
आशाओं में अपलक सारे, राह निहारे क्रांति।
विकट समस्या आज जगत् की, आए कैसे शांति।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क- 9835232978

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply