मन मेरा है मतवाला -रामकिशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

मन मेरा है मतवाला- हाकलि

मन मेरा है मतवाला।
फागुन ने जादू डाला।।
दुनिया लगती रंगीली।
करती हर-पल अठखेली।।

तरुवर पर झूलें झूला।
खेतों में सरसों फूला।।
उपवन फूलों से महका।
यौवन तन में है बहका।।

गाते हैं सब मिलकर होली।
मिलते ही साथी टोली।।
मधुरिम है सबकी बोली।
मन भाए अब हमजोली।।

मिलते ही गोरा मुखड़ा।
भूला देते हैं दुखड़ा।।
फिर रंगों से हम पोते।
उड़ जाते उसके तोते।।

फगुआ गाकर बहलाते।
दिल की बातें बतलाते।।
हम-सब यूँ हंँसते गाते।
मस्ती में रमते जाते।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।

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