रुद्र लिए अवतार- दोहा छंद गीत
चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा, रूद्र लिए अवतार।
संकटमोचन रूप में, प्रकट हुए संसार।।
पुत्र अंजना मातु के, पिता केसरी लाल।
जन्म हुआ हनुमान का, रघुवर भक्ति मिसाल।।
कपि कुल गौरव मानिए, कहते उन्हें कपीश।
अजर अमर का वर गहे, हनुमत बने सतीश।।
भक्त शिरोमणि बोलते, राम नाम जयकार।
संकटमोचन रूप में, प्रकट हुए संसार।।०१।।
बाल रूप बजरंग ने, भक्षण कर आदित्य।
क्षमता अपनी सिद्ध की, और बढ़ा लालित्य।।
स्वर्ण पुरी का कर दहन, बनें बुद्धि बल धाम।
कार्य किए कुछ भी कभी, कहते जय श्री राम।।
अतुलित बल के धाम को, नमन करूँ हर बार।
संकटमोचन रूप में, प्रकट हुए संसार।।०२।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि सहज, सीता से वर प्राप्त।
बजरंगी के नाम से, मिटते हर भय व्याप्त।।
महावीर हनुमान का, लेते जो भी नाम।
बाधाओं को पार कर, पूर्ण करे हर काम।।
महिमा यह हनुमान की, भक्त न हो लाचार।
संकटमोचन रूप में, प्रकट हुए संसार।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

