अपना श्रेष्ठ बिहार है – प्रदीप छंद गीत
युगों-युगों से गौरवशाली, अपना श्रेष्ठ बिहार है।
तपोभूमि यह गौतम जी की, सतत ज्ञान भंडार है।।
जनक दुलारी सुकुमारी की, जन्मभूमि यह ही रही।
विश्वामित्र तपस्वी की भी, कर्म भूमि यह ही रही।।
ज्ञान केन्द्र नालंदा का तो, चर्चा चारों ओर है।
रहा विश्व गुरु भारत बनकर, लाती नित नव भोर है।।
गंगा इससे होकर गुजरी, हुई धरा गुलजार है।
युगों-युगों से गौरवशाली, अपना श्रेष्ठ बिहार है।।०१।।
गंगा कोशी गंडक पुनपुन, नदियों की धारा बहे।
सोन घाघरा बागमती भी, कल-कल गायन कर रहे।।
दलहन तिलहन मक्का गेहूंँ, चावल खेती हो रही।
हरा भरा भू उपवन जैसा, मोह सभी में बो रही।।
पर्वत में जो राह निकाले, बसा यहाँ किरदार है।
युगों-युगों से गौरवशाली, अपना श्रेष्ठ बिहार है।।०२।।
आर्यभट्ट की पावन धरती, और अशोक महान की।
आदिकाल से गाथा गाती, भूमि यही श्रमदान की।।
दिनकर ने समझाया जग को, सबकी सृष्टि बिहार में।
मगही मैथिल भोजपुरी का, गान सकल संसार में।।
योगदान अगणित है अपना, सभी जगह भरमार है।
युगों-युगों से गौरवशाली, अपना श्रेष्ठ बिहार है।।०३।।
नोट:- प्रेषित रचना मौलिक एवं अप्रकाशित है।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

