पद्यपंकज Uncategorized मां -रुचिका

मां -रुचिका



माँ

शब्दों से परे,
अपरिभाषित
रिश्तों की नाजुक डोर से बंधी
माँ से शुरू जिंदगी
माँ ही जिंदगानी
माँ आदि और अंत है
माँ न कभी खत्म होने वाली कहानी।

माँ सुरक्षा का एहसास,
माँ जीवन के धूप छाँव में रहे खास,
माँ मरूभूमि में बुझाती प्यास,
माँ हर मर्ज की दवा
माँ दर्द में बन जाती है दुआ
माँ खुशियों की खत्म न होने वाली कहानी।

माँ अंतरंग सखी सहेली,
माँ सुलझाती जीवन की हर पहेली,
माँ अनुत्तरित प्रश्नों को करती हल,
वह है हमारे जीवन का संबल
माँ से ही मिलता है आत्मबल
माँ विश्वास की कभी खत्म न होने वाली कहानी।

रूचिका
प्रधान शिक्षिका
राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार

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