पद्यपंकज Uncategorized इंतजार रुचिका

इंतजार रुचिका



इंतजार

वक्त के शिकंजे में कसे हो
फिर क्यों करते हो बेहतर वक़्त का इंतजार।
जो मिला है वही बेहतर है,
कर लो उससे जी भर कर प्यार।

बेहतर के इंतजार में
जो मिला है उसको भी तुम खोओगे
भविष्य के गर्भ में क्या छुपा कौन जानता
कौन जानता हँसोगे या फिर रोओगे।

तुरन्त ही हो जाते अधीर
इंतजार के लिए सब्र कहाँ से लाओगे।
जी लो इस पल को भरपूर
नही तो बाद में तुम पछताओगे।

लम्बे इंतजार के बाद मिलने वाले का
कद्र बहुत होता है।
आसानी से जो मिल जाये वह अपनी
कीमत खोता है।
रूचिका
राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार

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