प्रभु जी सब आसरा तुम्ही हो ,
इसे दिल में बसाए रखना ।
प्रभु ज़ी तुमसे है हर नाता ,
सदा इसे बनाए रखना ।
दीप आशा क़े तुम्हीं जलाए ,
लाए संसार में तुम्हीं हो ।
कभी इसमें मन उलझता ,
सब रचाए रास तुम्हीं हो ।
मेरे मालिक भी तुम्हीं हो ,
हे जग के तू रचइया ।
अब तो लगाओ पार प्रभुजी ,
तुम्हीं जग के हो खेवइया ।
प्रभुजी चाहता ऐसी भक्ति ,
जो ज्योत जीवन को बना दे ।
प्रभुजी पाऊँ ऐसी शक्ति ,
जिससे तू मुझे अपना ले ।
प्रभु जी तेरी कृपा जब होती ,
सब रंग मुझे मिल जाते ।
ऐसी क़ोई बात ही न होती ,
जो मुझे न समझ आते ।
मेरा आसरा भी प्रभु तुम हो , ,
हो तुम्हीं सबके खेवनहारे ।
न तुझसे किंचित क़ोई विलग है ,
प्रभु सभी हैं तुम्हीं सहारे ।
आप जानते हो प्रभु सबकुछ ,
पर मैं अज्ञानी ठहरा ।
ज़ब मुझ पर तुम्हारी दया हो ,
तब मुझपर लगाओ पहरा।
हम भागे न इधर – उधर भी ,
जब तेरी प्रीत हो इतनी गहरी ।
केवल तुम और केवल तुम पर,
हो जब भक्ति नित ठहरी ।
अमरनाथ त्रिवेदी
पूर्व प्रधानाध्यापक
उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैंगरा
प्रखंड बंदरा , जिला मुजफ्फरपुर

