ये रंग तुम्हारा, संग तुम्हारा,ये पूरा प्रसंग तुम्हारा,
जीत हो या हो अब हार , होगी ना ये जंग दुबारा।
जल्द उठो तुम करो प्रयास, अपने ऊपर पूर्ण विश्वास
ख़ुद से ही खुद बात करो, न सुनो जग का उपहास।
तेरा यूं सहसा गिरना ही तेरे शत्रु की ताक़त है
गिरना संभलकर उठ जाना,ये वक्त की हिमाकत है।
ठिठक जाना यूं चलते चलते फिर पीछे तेरा मुड़ जाना
सही नहीं है बाधाओं से ऐसे तेरा घबराना।
यह जीवन एक संघर्ष है,युग पुरुष ने भी मानी है
यह जग जीता है उसने जिसने लड़ने की ठानी है।
लक्ष्य तुम्हारा मुश्किल है, नामुमकिन ये मंजूर नहीं
पथ पर बढ़ते राही से है अब मंज़िल बहुत दूर नहीं ।
ग़म पीकर भी डटे रहना यही उत्तम मानव का काम है
चलते रहना दरिया की तरह मत देखो कहां आराम है
अपने अंदर अपने सारे गम को तुम दबा डालो
गर मिल जायें खुशियां तो जमाने में बिछा डालो ।
जीवन एक अमानत है,इसे व्यर्थ नहीं गंवाना है।
आखिर इसी अमानत को हमें एक दिन लौटाना है।
गति तुम्हारी मंद हो और सफ़र तुम्हारा जारी हो
जीवन के इस पथ पर यूँ चल रही तुम्हारी गाड़ी हो ।
किस्मत पर रहने वालों का कोई जमाना नहीं होता है
यहां वीरों के लिए धरा पर कोई बहाना नहीं
Prashant Kumar pintu


