पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik,दिवस,देशभक्ति अट्ठाइस मोतियों की माला – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

अट्ठाइस मोतियों की माला – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

 चलो भारत की सैर करें,

भारत माँ के हम अट्ठाइस बेटे।

सब में हैं बड़े-बड़े गुण,

भारतवासी सभी सुन।

सबके गुण की बखान करूँ,

महिमा सबकी आज मैं गाऊँ।

हिमालय का मुकुट पहने, हिमाचल मुस्कुराता है,

पंजाब अपनी फसलों से, सोने सा लहलहाता है।

हरियाणा दूध-दही का खाणा, वीरों की वो शान है,

उत्तराखंड देवभूमि है, अध्यात्म की पहचान है।

राजस्थान की मरुभूमि, रजवाड़ों का इतिहास कहे,

उत्तर प्रदेश की गंगा-यमुना में, संस्कृति की धार बहे।

बिहार ज्ञान की धरती पावन, नालंदा का गौरव भारी,

झारखंड की खनिज संपदा, लगती है सबसे प्यारी।

मध्य प्रदेश तो हृदय देश है, सोयाबीन का घर कहलाता,

छत्तीसगढ़ धान का कटोरा, अपनी छटा बिखेरता जाता।

गुजरात रंगीला गरबा गाए, व्यापार का वो राजा है,

महाराष्ट्र शिवाजी की भूमि, लावणी की धुन ताजा है।

गोवा के सुंदर तट देखो, सैलानी जहाँ खिंचे आते,

कर्नाटक के चंदन-कॉफी, महक सब दूर फैलाते।

केरल तो साक्षरता में आगे, मसालों का वो बाग है,

तमिलनाडु की कला निराली, भरतनाट्यम का राग है।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, विकास की राह पे दौड़ रहे,

ओडिशा के जगन्नाथ स्वामी, श्रद्धा से सबको जोड़ रहे।

पश्चिम बंगाल की रसगुल्ले सी मीठी, बांग्ला भाषा की तान है,

सिक्किम जैविक खेती में आगे, सुंदर कंचनजंघा की शान है।

असम की चाय की खुशबू प्यारी, बिहू का नृत्य लुभाता है,

मेघालय तो बादलों का घर, वर्षा का गीत सुनाता है।

अरुणाचल में सूरज सबसे, पहले किरण बिखेरता है,

नगालैंड अपनी जनजातीय, संस्कृति को सहेजता है।

मणिपुर की रासलीला सुंदर, मिजोरम में बाँस का नृत्य सजे,

त्रिपुरा के ऊनाकोटी में, शिल्प कला के राग भजे।

ये हैं भारत माँ के अठ्ठाइस बेटे, सब में अनुपम प्यार है,

विविधता में एकता ही, हमारे देश का आधार है।

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

प्राथमिक विद्यालय रेही टोला

रानीगंज अररिया

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply