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विद्या और गुरु का महत्व



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विद्या और गुरु का महत्व

गुरु कुम्हार है, शिष्य कुम्भ है, गढ़ता रूप अनूप,

घड़-घड़ काढ़े खोट को, देकर ज्ञान का रूप।

भीतर हाथ सहार दे, पल-पल रखे ध्यान,

बाहर मारे चोट पर, मन में कूट कल्याण।

विद्या अर्जन सरल है, जो मन में ठाने कोय,

इस अनमोल रतन का, जग में जोड़ न होय।

जिसने इसको पा लिया, जिसने किया वरण,

उसका जीवन मुड़ गया, बदल गए सब चरण।

प्रतिदिन का अभ्यास ही, खोले सुख के द्वार,

कुछ घंटों की साधना, बदलेगी संसार।

जीवन होगा सुखमयी, रंगीन और खुशहाल,

मेहनत की इस राह पर, छात्र बनेंगे ढाल।

आलस का तज त्याग तुम, बढ़ो सफलता की ओर,

ज्ञान सूर्य चमकेगा अब, होगी नई भोर।

पुस्तकों को मित्र बना, रच दो नया इतिहास,

तुमसे ही तो टिकी हुई, इस भारत की आस।

श्रम का दीपक जो जले, मिटे तिमिर अज्ञान,

विद्या पाकर ही बनेगा, हर छात्र महान।

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

प्राथमिक विद्यालय रेही टोला

रानीगंजअररिया22.09.2026

 

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Dharmendra kumar Thakur

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