। गणतंत्र दिवस कविता – मुन्नी कुमारी।

। गणतंत्र दिवस।

छब्बीस जनवरी का दिन है सुहाना,
गणतंत्र हुआ है देश अपना ।
संविधान का मान बनाए रखना,
अधिकार अपना जताए रखना।

यह केवल पर्व नहीं, इतिहास की पुकार है,
गणतंत्र केवल बोल नहीं, संवैधानिक धार है।
समता केवल कानून नहीं,मानवता की पहचान है, भारत केवल देश नहीं, तिरंगा की शान है।

महापुरुषों की अमर कहानी है,
गुंज उठे बलिदानों की निशानी है।
इतिहास के पन्नो पर लिखी कहानी है,
भारत माँ की पहचान पुरानी है।

आओ इस पावन अवसर पर,
हर आत्मा को जगाएँगे।
संविधान को जीवन बनाकर,
भारत को और विकसित बनाएँगे।

जय हिन्द, जय भारत ।

रचियता- मुन्नी कुमारी
प्रधान शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय मोहनपुर मुशहरी
प्रखण्ड- झंझारपुर, मधुबनी
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मुन्नी कुमारी

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