हांं, हूं मैं एक अंतर्मुखी, रहती, हूं मैं स्वयं में सिमटी, कभी हूं मैं कविता मन के तरानों की, कभी[...]
Day: November 18, 2022
मां – नवाब मंजूरमां – नवाब मंजूर
जिसके साए तले बढ़ते हैं राजा और रंक या फिर हो कोई मलंग जन्म से लेकर जवानी तक उसी के[...]
ऐ इंसान तुम इंसानियत क्यों भूलते हो -नीतू रानीऐ इंसान तुम इंसानियत क्यों भूलते हो -नीतू रानी
ऐ इंसान तुम इंसानियत क्यों भूलते हो कभी भी मेरी खोज नही करते तुम न हीं कभी कोई खैरियत पूछते[...]
दिल के आंसू -जय कृष्णा पासवानदिल के आंसू -जय कृष्णा पासवान
दुनिया के हर सितम, मुझपे छलकती है । मगरूर है ज़माना देखो, क्या मजाक उड़ाती है।। “तपता है दिल मेरा”[...]
