सुन्दर सुभग मिथिला धाम से, पावन पवित्र भूमि रे। ललना रे जहां बसु राज विदेह, प्रजा प्रतिपालक रे। चकमक मिथिलाक मन्दिर, खहखह लागै गहबर रे। ललना रे सिया अइली धरती…
Author: Anupama Priyadarshini
माँ – रूचिका
जीवन की कड़ी धूप में शीतलता का एहसास, माँ हर रिश्तों से है जुदा बेहद हीं खास, माँ जीवन की आपाधापी में एक नरम ठाँव, माँ से ही जुड़ी है…
सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय – नूतन कुमारी
उन्नति करें हम सब यों ही, सब संभव होगा, है विश्वास, अग्रणी होगा देश प्रतिपल, सबका साथ, सबका विकास। जन-जन का उद्धार हो, मिट जाए सबकी भूख-प्यास, ऐसी खुशहाली हो…
दहेज -डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
माँ के भला कोख़ में क्यों मरती बेटियाँ, जन्म लेती नमक क्यों हैं चखती बेटियाँ। समाज के दरिंदों तुम आवाज़ मेरी सुन, खुद मरती रहीं तुमको हैं क्यों जनती बेटियाँ।…
मानवता का हित करें – मनु कुमारी
(दोहा छंद) मानवता का हित करें, चलें नेम आचार। दीन दुखी से प्रेम हो, करिये पर उपकार।। क्रोध अगर कोई करे, पास न जाएं आप। मीठी वाणी बोलकर, हरिये फिर…
जानकी नवमी – राम किशोर पाठक
जनक के राज्य में ऐसा भयंकर ग्रीष्म आया था। सरोवर, खेत सूखे थें, नहीं कोई हल चलाया था।। किया था खेत शोधन तो वहाँ पर सीत टकराया। मिला था बंद…
अलख जगाना है – मृत्युंजय कुमार
नन्हें-मुन्हें बच्चों में शिक्षा का अलख जगाना है। राष्ट्र- निर्माता होने का अपना फर्ज निभाना है।। समाज के दबे-पिछड़ों को शिक्षा का महत्व बताना है। कुशल शिक्षक होने का अपना…
आलोचना एवं समालोचना – सुरेश कुमार गौरव
आलोचना सत्य हो, रहे उचित आधार, मन को चोट दे नहीं, बोले मधुर विचार। कटु वाणी की धार से, न टूटे मनहार, शब्द वही संजीवनी, जिससे हो उपकार। कहना सबको…
आदमी और जंगल- संजय कुमार
बूढ़ा बरगद रो-रोकर, यूं मुझसे कहने लगा! क्या बिगाड़ा था? क्या बिगाड़ा था हमने? कि तुम और तुम्हारी जात ने, विकास का नाम दिया, हमसे और हमारी जात से, यूं…
टीचर्स ऑफ बिहार- नूतन कुमारी
व्याख्या कैसे करुँ तेरा, विस्तार तेरा है सीमित नहीं। टीओबी है टीम अनूठा, उदाहरण से वर्णन किंचित नहीं।। पद्य पंकज और गद्य गुंजन से, हर रोज सजे इसकी बगियाँ। दिवस…