मन की चाह -एस.के.पूनम

मुक्त रहूँ निशा के स्याह चादर से, बहते शीतल पवन के झोंकों में, भोर भए अंगडाई लूँ नूतन वेला में, प्रकृति की सौंदर्य समाहित हो मुझमें। बंद चक्षुओं को खोलता…

कचरा प्रबंधन -मधु

कचरे को इधर-उधर ना फेको भाई, इसमें है सारे जग की भलाई। कूड़ा को कूड़ेदान में डालो, चारों ओर न गंदगी फैलाओ। दो कूड़ेदान देख हम सभी हैरान, दो रंगों…