पिता – गिरीन्द्र मोहन झा

परमपिता परमेश्वर हैं, हम सब उनके संतान, उन्हीं की अनुकम्पा से, हम सब सदा क्रियमाण । सबसे पहले परमपिता परमात्मा को प्रणाम, उन्हें वन्दन, उनका स्तवन, पुण्यप्रद उनके नाम।। पिता…

शुभ्रक की अमर गाथा – अवनीश कुमार

आओ सुनाऊँ तुम्हें, एक बेज़ुबान, स्वामीभक्त शुभ्रक की अमर कहानी… जब ऐबक ने राजपुताना लूटा, मेवाड़ का वैभव मिट्टी में रौंदा, राजा रावल सामंत सिंह का रक्त बहाया, राजकुमार करण…

दर्पण- राम किशोर पाठक

छंद – दोहा किरणें आती जो रही, लौटाती उस ओर। सतह परावर्तक सदा, कहलाती वह छोर।। सतह परावर्तन करे, दर्पण उसका नाम। वापस लौटाना सदा, होता जिसका काम।। सतही संरचना…

मर्यादा की रास में – राम किशोर पाठक 

दोहा छंद मर्यादा की रास में, पंचवटी में राम। शूर्पणखा आकर वहॉं, देख रही अविराम।।१।। सूरत मोहित कर गया, जगी काम की आग। सुंदर छवि लेकर गयी, करने वह अनुराग।।२।।…

वन हैं धरती की पहचान – सुरेश कुमार गौरव

वन हैं जीवन की पहचान, इनसे धरती रहे महान। शुद्ध हवा औ’ निर्मल पानी, इनसे हरियाली मुस्कानी।। पंछी गाते मीठे स्वर गान, वन देते सबको वरदान। फल-फूलों की यह सौगात,…

विश्व विरासत दिवस – राम किशोर पाठक

मनहरण घनाक्षरी सभ्यता का इतिहास, मिले जानकारी खास, करे विश्व एहसास, धरोहर पाइए। अठारह अप्रैल को, संस्कृति संरक्षण को, भूतल उत्खनन को, विचार बनाइए। सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक स्थल रत, ज्ञान…

बिहार: संस्कृति का समृद्ध सार – सुरेश कुमार गौरव

राजगृह की पावन वादियाँ, ऋषियों की तपभूमि, गृद्धकूट की चोटी बोले, बुद्ध की अमिट प्रतीति। सप्तधाराएँ बहती जातीं, गूंजे जहां ज्ञान-विचार, हे मगध! तू गौरव-गाथा, तू भारत का उद्गार। बोधगया…

शिक्षक हूॅं बिहार का – राम किशोर पाठक

शिक्षक हूॅं बिहार का, ज्ञान के विस्तार का। बच्चों का भविष्य मैं, मार्ग हूॅं संसार का।। अलख जगाता रहता, सबमें सदाचार का। बच्चों में विचार का, कक्षा नवाचार का।। प्रतीक…