Author: Anupama Priyadarshini

बाल कविता – पेंसिल – राम किशोर पाठकबाल कविता – पेंसिल – राम किशोर पाठक

0 Comments 8:16 pm

पेंसिल की है बात निराली, चलती है यह काली काली। अब तो रंग बिरंगी है आती, बच्चों का मन खूब[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

चित्रधारित सृजन – नीतू रानीचित्रधारित सृजन – नीतू रानी

0 Comments 8:10 pm

जल से भरकर पात्र को रखना निशदिन भाय, आएगी चिड़िया पानी पीने जाएगी प्यास बुझाय। पीती है पानी चिड़िया हृदय[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

जीने का अधिकार – राम किशोर पाठकजीने का अधिकार – राम किशोर पाठक

0 Comments 8:01 pm

छंद – दोहा जीने का अधिकार है, सबको एक समान। जीव-जंतु सबका करें, रक्षा बन बलवान।।१।। रखिए हरपल हीं यहॉं,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

पिता – गिरीन्द्र मोहन झापिता – गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 6:46 pm

परमपिता परमेश्वर हैं, हम सब उनके संतान, उन्हीं की अनुकम्पा से, हम सब सदा क्रियमाण । सबसे पहले परमपिता परमात्मा[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

शुभ्रक की अमर गाथा – अवनीश कुमारशुभ्रक की अमर गाथा – अवनीश कुमार

0 Comments 6:40 pm

आओ सुनाऊँ तुम्हें, एक बेज़ुबान, स्वामीभक्त शुभ्रक की अमर कहानी… जब ऐबक ने राजपुताना लूटा, मेवाड़ का वैभव मिट्टी में[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

दर्पण- राम किशोर पाठकदर्पण- राम किशोर पाठक

0 Comments 6:36 pm

छंद – दोहा किरणें आती जो रही, लौटाती उस ओर। सतह परावर्तक सदा, कहलाती वह छोर।। सतह परावर्तन करे, दर्पण[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

एक छोटी चिड़िया – नीतू रानीएक छोटी चिड़िया – नीतू रानी

0 Comments 6:32 pm

एक छोटी चिड़िया, तिनका लेके आई। एक- एक तिनके से , सुंदर घोंसला बनाई। घोंसले में दी चार छोटे अंडे,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

यह नव वसंत कुछ बोल रहा – अमरनाथ त्रिवेदीयह नव वसंत कुछ बोल रहा – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 6:24 pm

जीवन में अमृत घोल रहा , यह नव वसंत कुछ बोल रहा । कौशल है  इसकी छटाओं में , हर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
ram किशोर

मर्यादा की रास में – राम किशोर पाठक मर्यादा की रास में – राम किशोर पाठक 

0 Comments 6:19 pm

दोहा छंद मर्यादा की रास में, पंचवटी में राम। शूर्पणखा आकर वहॉं, देख रही अविराम।।१।। सूरत मोहित कर गया, जगी[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

वन हैं धरती की पहचान – सुरेश कुमार गौरववन हैं धरती की पहचान – सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 7:13 pm

वन हैं जीवन की पहचान, इनसे धरती रहे महान। शुद्ध हवा औ’ निर्मल पानी, इनसे हरियाली मुस्कानी।। पंछी गाते मीठे[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें