विषय -छब्बीस जनवरी। शीर्षक -सखी हम झंडा फहरेबै हे। एलै छब्बीस जनवरी केअ त्योहार, सखी हम झंडा फहरेबै हे। झंडा फहरेबै गणतंत्र दिवस मनेबै , गेबै हम जन गण मन…
Author: Dr Snehlata Dwivedi
खामोशी रुचिका
खामोशी जब बोलना बेअसर होने लगे तो रास आने लगी खामोशी। खामोशी जो थी अपने में समेटे न जाने कितनी बातें कितने अरमान,कितनी चाहतें कितनी शिकायतें,कितनी मोहब्बतें। ख़ामोशी सदा ही…
एक हो हम -कार्तिक कुमार
गीत : एक हों हम, हक़ की आवाज़ यूजीसी के फैसलों ने सवाल खड़े किए, छात्रों–शिक्षकों ने सच के दीप जले किए। स्वर्ण हो या दलित, पिछड़ा आदिवासी, हक़ की…
गणतंत्र दिवस का उल्लास रामकिशोर पाठक
गणतंत्र दिवस का उल्लास- सरसी छंद गीत जब सबमें है उत्साह भरा, आ जाओ जी पास। ध्वज अपना फहराकर हम-सब, पाएँ कुछ उल्लास।। भला सभी का जिससे होता, वैसा हो…
बागेश्वरी मां -रामपाल प्रसाद सिंह
हरि गीतिका छंद बागेश्वरी माॅं श्वेतपद्ममा,ज्ञानदा या भारती। आकार सबके एक जिनकी,हम उतारे आरती।। शुभ भोर सुंदर पूर्व से ही,देव जागे हैं यहाॅं। दिनकर सजाकर रश्मियाॅं पर,संग भागे हैं यहाॅं।।…
वंदनवार सजे शारदा -रामपाल प्रसाद सिंह
वंदनवार सजे शारदा ऐसा अद्भुत भोर। क्षितिज चतुर्दिक दे रहा,ऑंधी जैसा शोर। प्रात:काली भूल कर, पूर्वज ढाड़े लोर।। कहीं भजन कीर्तन ठने,कहीं राम का बोल। कहीं शारदा सादगी,सह भोजपुरी झोल।।…
जय मां शारदे माँ तू अपने शरण में रखो अब सदा, है नमन कोटि रखना चरण मे सदा. तू दे दे हमें माँ ये आशीष कदा, ज्ञान जीवन में सुरभित…
आया बसंत आशीष अम्बर
कविता :- आया बसंत दिन को सूरज लगा चमकने, हवा लगी अब सरसर बहने । पत्ते पीले पड़े पेड़ के, झड़ते हवा संग हैं उड़ते । ऋतु बसंत का स्वागत…
मान मिल जाए -रामकिशोर पाठक
मान मिल जाए- गजल १२२२-१२२२, १२२२-१२२२ दबे कुचले यहाँ जो भी, उन्हें सम्मान मिल जाए। रहे कानून में समता, सही पहचान मिल जाए।। हमें रखना सदा होगा, यहाँ पर ध्यान…
मैं टीचर ऑफ बिहार हूं -रामकिशोर पाठक
मैं टीचर्स ऑफ बिहार हूँ – गीत शिक्षा का अटल आधार हूँ। मैं टीचर्स ऑफ बिहार हूँ।। बच्चों के कोमल भावों को। अपनाकर सभी सुझावों को।। शिक्षण का बना व्यवहार…