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नया साल -अवधेश कुमार


Awedhesh kumar

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नया साल – घर, स्कूल और मुस्कुराहटें

सुबह की धूप ने जब आँगन छुआ,
गुलाबी ठंड ने हौले से कहा — “नया साल आया!”
घर में रौनक, खुशियों का मेला,
बाजार में थी रौनक और शॉपिंग का मेला ।

स्कूल के गेट पर गायब थी बच्चों की कतार,
कुछ बच्चों के चेहरों पर थी मुस्कान और प्यार,
सज उठा स्कूल बच्चों की बाल कविताओं से ,
जैसे “नव वर्ष खिला हो” — खुशियों के फूल से ।

मंच सजा था बच्चों के लिए,
किंतु शिक्षकों ने भी इसमें अपना योगदान दिए ।
बालगीत, कविता और प्रेरक प्रसंग ,
शिक्षक बोले — “हर साल नयी दिशा के संग ।
सीखो, बढ़ो, और रोशनी फैलाओ,
अपने जीवन में मानवता और ईमानदारी का पाठ अपनाओ ।”

शाम ने जब अपनी कहानी कही,
हँसी और गाने की लहर बनी,
घूमता रहा मन में नये संकल्पों का एक नया गीत —
“हर दिन नया हो, यही हो नया साल से हमारी प्रीत ।”

प्रस्तुति : – अवधेश कुमार
उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय रसुआर

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