पद्यपंकज Deshbhakti,sandeshparak आजादी का दिव्य पर्व महान-बेबी अर्चना 

आजादी का दिव्य पर्व महान-बेबी अर्चना 



है हिन्द-सिंध अपना हिय सनातन

आजादी का यह दिव्य पर्व महान

गुलामी- कलुषित- कालिमा का

आज ही के दिन हुआ अवसान

सदियों फैली पीड़ित मानवता

गुलामी की बेड़ियों में थी जनता

अंग्रेजी दमन से मिली तब मुक्ति

एकजुट हुई जब भारत की जनता

अखंड हो गया खंडित भारत

मिली अपनी संपूर्ण पहचान

गुलामी- कलुषित- कालिमा का

आज ही के दिन हुआ अवसान

रक्त की जाने कितनी धार बही

कितनी माँओं की सूनी कोख हुई

माँ भारती की अस्मिता की खातिर

जाने कितनी ही सेना कुर्बान हुई

हिंदु – मुस्लिम और सिख- ईसाई

सब भारत माता की हैं पहचान

गुलामी- कलुषित -कालिमा का

आज ही के दिन हुआ अवसान

यह गाँधी के सपनों का भारत

लोकहित निज-अस्तित्व समाहित

करते अहर्निश हम राष्ट्र वंदना

बैर -भाव से न हो कोई आहत

हो सर्वधर्म- समभाव- समन्वय

मातृभूमि का करें मिल यशोगान

गुलामी- कलुषित- कालिमा का

आज ही के दिन हुआ अवसान

हो सौम्य उज्जवल धवल छवि

जन- जन की हो पहचान यही

है मातृभूमि से ही अपना गौरव

सिर मुकुट शोभित है हिमगिरि

गंगा की पावन जलधारा संग

मस्तक कर लें हम दिव्यमान

गुलामी-कलुषित- कालिमा का

आज के ही दिन हुआ अवसान

रक्षक बन न पाएँ अब भक्षक

विश्वबंधुत्व का आओ लें शपथ

स्वार्थरहित निस्वार्थ भाव संग

एकदूजे संग चलें राह सतपथ

अपने हिस्से के मिले आसमां में

हर बहन-बेटियों का हो सम्मान

गुलामी-कलुषित-कालिमा का

आज ही के दिन हुआ अवसान।

स्वरचित 

बेबी अर्चना 

मध्य विद्यालय कुआड़ी 

कुर्साकांटा, अररिया

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