सावन आया झूला झूलें,
धरती से गगन को छू लें,
काली बदरी नभ में छाई,
रिम-झिम-रिम-झिम वर्षा आई,
बच्चे समाते नहीं फूले ।
सावन आया झूला झूलें।
इस झूले की पेंग बढ़ाना,
प्यार से धक्का दे जाना,
आगे-पीछे, पीछे आगे,
खेल छोड़कर बच्चे भागे,
गिनती करना हम तो भूलें ।
सावन आया झूला झूलें।
फूलों पर जब उड़े तितलियाँ,
भँवरे रस पीने को आएँ ,
प्रकृत्ति का सुन्दर घर-आँगन,
भीनी खुशबू से महकाएँ,
बालक हैं खुलकर हम जी लें।
सावन आया झूला झूलें।
सावन ने है झड़ी लगाया,
कृषक का त्यौहार है आया,
खेतों में घुटनों तक पानी,
फसलों की है नई कहानी,
धान को समय पर बो लें।
सावन आया झूला झूलें।
रत्ना प्रिया
शिक्षिका (11 – 12 हिन्दी )
उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर
चंडी ,नालंदा

