बाल मन – ज्योत्सना वर्द्धन
बाल मन है कितना कोमल
सपनों में रहता है उलझा
नन्हें ख्वाब बुनती है निंदिया
बाल मन है कितना कोमल
समय से सब काम होये
पीड़ा न ये कोई सहे
पढ़े लिखे सब ज्ञानी हो
बाल विवाह कुरीति है
अंधविश्वास कि रीति है
पढ़ लिख कर जागरुकता लाओ
कुरीति मिटाओ कुरीति मिटाओ
देश में समद्धि लाओ
ज्ञान से भर दो उनका दामन
प्रकाश बन जाए जीवन
भविष्य उज्जवल हो उनका
खुशियाँ बांटें हरपल हरदम
उम्र ही तो होती है खास
करते हैं जब हम सब बात
समय से ही रे मना
सब काज है होत
मेहनत है सबसे बड़ी औजार
साहस आता जिससे अपार
न कर पाता कोई हम से व्यापार
विवाह एक संस्कार है
बाल मन का बोझ इसे बनाओ न
बाल विवाह पर लगाम लगाओ
अंधविश्वास अज्ञानता दूर भगाओ
राष्ट निर्माता बने सभी
ज्योत्सना वर्द्धन
उत्क्रमित मध्य विद्यालय पहाड़चक मोतीपुर मुजफ्फरपुर
