पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik बेटियों से बदसलुकी-राहुल कुमार रंजन 

बेटियों से बदसलुकी-राहुल कुमार रंजन 


Rahul Kumar Ranjan

बेटी को कमजोर समझना,

ये कैसी सोच हमारी है?

जिसके आने से घर महके,

वही क्यों आज बेचारी है?

बेटी भी इंसान है आखिर,

उसके भी अरमान हैं।

उसकी हँसी न छीनी जाए,

उसके भी सम्मान हैं।

जो हाथ उसे सहलाने थे,

वो हाथ न उसको डराएँ।

जो होंठ दुआ देते थे,

वो उसको गाली न सुनाएँ।

बेटी बोझ नहीं, अभिमान है,

बेटी घर की शान है।

उसकी इज़्ज़त की रक्षा करना,

हर इंसान का फर्ज़ महान है।

बदसलुकी को चुप मत सहना,

आवाज़ उठानी होगी।

बेटियों के सुरक्षित कल की,

नींव आज बनानी होगी।

जिस दिन बेटी बेखौफ चलेगी,

उस दिन सच्ची जीत हमारी होगी।

बेटी के सम्मान से ही तो,

समृद्ध और सुंदर दुनिया हमारी होगी।

राहुल कुमार रंजन 

प्रधानाध्यापक 

मध्य विद्यालय ओरलाहा

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