छै येहा धारना दूनिया के, बेटी पराई होते छै। पर बिना बेटियौ के जग में, तकदीर सब के सुतले छै।[...]
Category: प्रेम
बेटी धन अनमोल – कुमकुम कुमारीबेटी धन अनमोल – कुमकुम कुमारी
मेरे जन्म से पापा क्यों डरते हो, मुख अपना मलिन क्यों करते हो? बेटी हूँ कोई अभिशाप नहीं, फिर मन[...]
फूल मनहरण घनाक्षरी-मनु कुमारीफूल मनहरण घनाक्षरी-मनु कुमारी
फूल मनहरण घनाक्षरी आओ बनें हम फूल, गम सारे जायें भूल प्रेम माल बनूं मैं, देख तू संसार के! बनके[...]
मनहरण घनाक्षरी – कुमकुम कुमारीमनहरण घनाक्षरी – कुमकुम कुमारी
मनहरण घनाक्षरी चले वसंती बयार, छाया सबपे खुमार, होकर हंस सवार, आई चन्द्रकांति माँ। छेड़ दी वीणा की तार, झंकृत[...]
ग़ज़लग़ज़ल
ग़ज़ल जब हम अपने पर आए वो भी अपने घर आए। उनकी भोली सूरत पर पता नहीं क्यों मर आए।[...]
लिखना पहला प्रेम साबित हुआ।।लिखना पहला प्रेम साबित हुआ।।
लिखना पहला प्रेम साबित हुआ।। लिखना सबसे बड़ा गुनाह था हम गुनहगार हुए जन्म के साथ ही झाड़ू कटका में[...]
