ऐसे हमारे पापा प्यारे पापा पापा कितने प्यारे, हम बच्चों के कितने न्यारे। हमें समझाते कितने अच्छे, बातें करते कितने [...]
Category: बाल कविता
गिरते दाँत और गाजर- अवनीश कुमारगिरते दाँत और गाजर- अवनीश कुमार
नाना जी ने बोई गाजर रोज सुबह पानी देते आकर। राजू नाना से पूछा जाकर नानू यह गाजर कब तक[...]
पेजर का भय- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’पेजर का भय- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
काग बोलता रहा डाल पर, क्या लिखा दुनिया के भाल पर? तेरे अस्तित्व पर मैं टिका हूॅं, तुझसे बहुत मैं[...]
जंगल में मंगल – मधु कुमारीजंगल में मंगल – मधु कुमारी
संग हरियाली के जी ले पल दो पल, करती सरिता जहाँ पग-पग कल-कल। मनहर-सी छटा छाई धरा पर हरपल,[...]
राजू के घर चली मासी – अवनीश कुमारराजू के घर चली मासी – अवनीश कुमार
राजू के घर चली मासी बच्चों के लिए ली गरमा-गरम समोसे। रास्ते मे बंदर आया, झपटा थैला, ले गए[...]
इंद्रधनुष – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’इंद्रधनुष – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’
नभ में इंद्रधनुष को देखो, कितना प्यारा लगता है। मन करता है इसको छू लें, सुंदर न्यारा लगता है।। प्रथम[...]
बच्चों का अंदाज- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बच्चों का अंदाज- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
आने वाले समय की,उसको न चिंता होती, हमेशा वो हर पल, रहता बिंदास है। आँखों में बसा के चित्र, सबको[...]
सुनो कहानी – मीरा सिंह “मीरा”सुनो कहानी – मीरा सिंह “मीरा”
आयी है फिर रात सुहानी। आओ हम सब सुने कहानी।। एक समय की बात पुरानी दादी कहती रोज कहानी। परी[...]
दाँत दर्द – नीतू रानीदाँत दर्द – नीतू रानी
मैंने मानी पापा की बात, जो दाँत दर्द से पाई निजात। बहुत जोड़ से उठा दाँतों में दर्द लगता था[...]
ओ सूरज चाचू – अवनीश कुमारओ सूरज चाचू – अवनीश कुमार
ओ सूरज चाचू! थोड़ा गुस्सा कम दिखाओ ना थोड़ा गुस्सा कम दिखाओ ना ओ काले बादल भैया! खूब बारिश बरसाओं[...]
