बच्चों को सीख सुबह सवेरे तुम उठ जाओ, पढ़ने में तुम ध्यान लगाओ, खेलो कूदो मौज करो तुम, जीवन में तुम खुशियाँ पाओ। अपने बड़ों का करो सम्मान, जग में…
Category: बाल कविता
भारत माता का मैं लाल – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
भारत माता का मैं लाल उठता नित सूरज से पहले, नित उठ करता ज्येष्ठ प्रणाम। मात पिता दादा दादी संग, नमन हृदय करू मैं व्यायाम। हाथ मुंह धोकर प्रात में…
फलों का राजा आम- राम किशोर पाठक
फलों का राजा आम- बाल कविता फलों का राजा होता आम। मन को ताजा करता आम।। मीठे खूब रसीले आम। हरे, लाल और पीले आम।। बच्चे, बुढे सभी ललचाए। बड़े…
स्व कर्तव्य के दीवानें – अमरनाथ त्रिवेदी
स्व कर्त्तव्य के दीवाने नन्हें मुन्ने हमें न समझें , बुद्धि के बड़े सयाने हैं । स्व कर्त्तव्य पथ पर चलने को हम सब बड़े दीवाने हैं । नित्य क्रिया…
दसों दिशाएँ – बाल कविता – राम किशोर पाठक
दसों दिशाएँ – बाल सुलभ कविता जहाँ सूरज रोज निकलता है। जिधर से नभ में चढ़ता है।। पूरब उसको कहते प्यारे। सुबह रोज हीं दिखता प्यारे।। दिन बीते जब होती…
चंदा मामा और तितली रानी – सुरेश कुमार गौरव
चंदा मामा और तितली रानी चंदा मामा आए नभ में, चुपके से मुस्काए। तारों की महफिल में आकर, मीठे गीत सुनाए।। नीली-पीली तितली रानी, फूलों पर इतराई। चंद सफर की…
सफल बनो- मनमोहन छंद – राम किशोर पाठक
सफल बनो- मनमोहन छंद प्यारे बच्चों, बनो सफल, श्रम से होते, सभी सबल, रुकों नहीं तुम, चलो निकल, श्रेष्ठ सीख का, करो अमल। बनना तुमको, वीर प्रवर, रोके कोई, नहीं…
मेरे गाँव की नदिया – संस्कृति चौधरी
गिरती है पर्वत से नदिया, मेरे गाँव से बहकर जाती है बारिश में नदिया इठलाती है, हम बच्चों को खुश कर जाती है फिर कुकू कोयल गाती है, सबके मन…
मेरी मुन्नी- बाल कविता- राम किशोर पाठक
मेरी मुन्नी सुबह खिड़की जब खोली माई, सूरज की किरणें थी आई। मुन्नी आँखें खोल न पाई, मईया ने आवाज लगाई।। आँखें मींचकर मुन्नी उठी, मईया से जैसे हो रुठी।…
फल, फूल, सब्जी- नीतू रानी निवेदिता
फल, फूल, सब्जी, खाइए भरपूर जी। चीनी, तेल, घी, खाने से पहले मुँह को लें सी। ज्यादा न खाओ चावल आलू, बन जाओगे मोटे भालू। खाने में लें ज्यादा सब्जी,…