उपवन नवरात्र का- सार छंद- रामकिशोर पाठक

उपवन नवरात्र का- सार छंद आज हमारा पुष्पित उपवन, देख चकित संसार। रंग बिरंगे फूलों से यह, शोभित है घर बार।। प्रथम दिवस से नवरात्र जहाँ, लगता माँ दरबार। बारी-बारी…

रुठी क्यों दुखहरणी माता- बिंदु अग्रवाल

रूठी क्यों दुखहरणी माता रूठी क्यों दुखहरणी माताकैसे मैं तुझे मानाऊँ?कैसी विकट प्रतीक्षा की हैकैसे मैं तुझे बताऊँ? न जानूँ मैं जप तप ध्यानाकैसे तुझे रिझाऊँ?मुझमें नहीं है धैर्य राम…

त्वमेका शिवा- राम किशोर पाठक

त्वमेका शिवा – स्त्रोत सदा शक्ति आलंब भक्तान माता, न जानामि योगं जपं नैव ज्ञाता।सदा कल्पनाशील तुभ्यम् भजेहं, नमो दिव्य रूपं नमो सर्व त्राता।। त्वमेका शिवा आदि रूपा अनूपा, त्वमेका…

माता जगतारिणी -रामपाल प्रसाद सिंह

हे माता! जगतारणी कुंडलिया छंद माता! तुम जगतारणी, जाना है भवपार। थाल लिए द्वारे खड़ा,कर ले तू स्वीकार।। कर ले तू स्वीकार,समय चाहे ले जितना। चरणों के ही पास,जगह दे…

जय स्कंदमाता स्नेहलता द्विवेदी

जय स्कंदमाता ममतामयी माँ ममतामयी तू है जगदम्बा, तू कार्तिकेय सुत जननी है। ताड़कासुर बध संकल्प लिये, माँ तू संतन हित करनी है। चार भुजायें धारण कर, पद्मासना तू महारानी…

हे शुभंकरी -रामकिशोर पाठक

हे शुभंकरी सुधा त्रिधा त्वम् गायत्री। सती शिवा त्वम् सावित्री।। त्वयि नंदजा राधा त्वम् भक्तवत्सला आद्या त्वम् आदिशक्ति शक्ति दात्री। सती शिवा त्वम् सावित्री।। रसे रूपे च गंधे त्वम् कणांकणे…

रामपाल प्रसाद सिंह – वंदनवार सजे शारदा

वंदनवार सजे शारदा चतुर्थ दिन छाया शुभ जग में,कुष्मांडा तेरी जय हो। नर-नारी निर्भय नाचत है,हृदय-सिंधु पावनमय हो।। लीला तेरी अद्भुत माते,बोल शब्द गूॅंगे मढ़ते। बहरे से संवाद बनाती,लॅंगड़े तो…

भक्ति कैसे करें

कविता का शीर्षक:- ” मौन है” आज दुखी सब कौन है? जिसके जीवन में योग संविधान स्वर्वेद मौन है? साधना सेवा सत्संग आज सभी में मौन है? तभी तो ज्ञान…