मौनम् कः अद्य दुःखितः? यस्य जीवनं योगः, संविधानम्, स्वर्वेदः च मौनम् अस्ति। साधना, सेवा, सत्सङ्गः अद्य सर्वेषु मौनम् अस्ति।[...]
Category: Bhakti
For the attainment of God in the world, for the welfare of the person, one has to do spiritual practice for salvation. For this, Bhakti is the best. Therefore, devotion to God and having prayer and meditation is called Bhakti.
दस्तूर दुनिया की- विधाता छंद मुक्तक- राम किशोर पाठकदस्तूर दुनिया की- विधाता छंद मुक्तक- राम किशोर पाठक
विधाता छंद मुक्तक जिसे रोना नहीं आया उसे कोई नहीं समझा।गमों के दौर से बोलो नहीं वह कौन जो उलझा।सदा[...]
शरद पूर्णिमा – गिरीन्द्र मोहन झाशरद पूर्णिमा – गिरीन्द्र मोहन झा
शरद पूर्णिमा की रात सुहावन, है अति मनभावन, चंद्रमा की चांदनी, उजाला, शीतलता, है अति पावन, चंद्रदेव अमृत-वृष्टि हैं कर[...]
मनहर कृष्ण- महामंगला छंद, राम किशोर पाठकमनहर कृष्ण- महामंगला छंद, राम किशोर पाठक
अंजन धारे सतत, कृष्ण कन्हाई नैन। देख लिया जो अगर, कैसे पाए चैन।। मूरत मनहर सुघर, मिले न कोई और।[...]
संशय में कृष्ण- महामंगला छंद- राम किशोर पाठकसंशय में कृष्ण- महामंगला छंद- राम किशोर पाठक
कृष्ण कन्हैया अगर, आते मिलने आज। होते विस्मित मगर, देख सभी के काज। माखन मिसरी सहज, उनको देता कौन। दुनिया[...]
गणपति वंदना – राम किशोर पाठकगणपति वंदना – राम किशोर पाठक
महामंगला छंद हे गणपति गजवदन, तुम्हें नवाऊँ शीश। देव पूज्य तुम प्रथम, कृपा करो जगदीश।। गिरिजा नंदन नमन, तुमको बारंबार।[...]
गुरुद्वार-मैं जाऊंगी बार-बार – नीतू रानीगुरुद्वार-मैं जाऊंगी बार-बार – नीतू रानी
विषय -गुरुद्वार।शीर्षक -मैं जाउँगी बार -बार। मेरा सबकुछ है गुरुद्वार,मैं जाउंँगी बार- बार। मेरे माता-पिता गुरु हैंमेरे बंधु सखा गुरु,मेरे[...]
मां भवानी – रामपाल प्रसाद सिंह अनजानमां भवानी – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
पद्धरी छंदसम -मात्रिक छंद, 16 मात्राएँआरंभ द्विकल से,पदांत Slअनिवार्य। प्रकट सिद्धिदात्री दिव्य भाल।आभासी अतिविकट विकराल।।पूर्ण कर अभ्यागत के आस।भर दें[...]
माता से विनय – राम किशोर पाठकमाता से विनय – राम किशोर पाठक
माता से विनय- चौपाई छंद सुन लो माता विनय हमारी।तेरी महिमा न्यारी – न्यारी।।दुष्टों का संहार किया है ।भक्तों का[...]
नरतन का – नीतू रानीनरतन का – नीतू रानी
प्रभु भजन। तूने रच के बनाया भगवानपाँच तत्व से नरतन का—२। नैन दियो हरि दर्शन करन कोमुख दियो कर गुणगान,पाँच[...]
