चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता

चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता यहाॅं कुछ लोग हैं दिखते, सुवासित कर रहे जग को। कटीली झाड़ियों में से, निकाले थे कभी मग को।। अभावों…

संसार- दोहे – राम किशोर पाठक

संसार- दोहे जैसी मन की भावना, वैसा ही संसार। अपने-अपने कर्म की, झेल रहे सब मार।।०१।। दुख को जो है झेलता, कहे दुखी संसार। खुशियाँ जिसको हैं मिली, वह करता…

दोहे – राम किशोर पाठक

दोहे सोमेश्वर सबके सखा, सहज सुलभ संसार। संकटमोचक सम सदा, सकट सतत संहार।। भ्रमित भँवर भव-भय भुवन, भजन भाव भगवंत। सरल साधना संग सह, सहज सुलभ सब संत।। शुभद शिवाला…

सजनी अपने आप से रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

सजनी अपने आप से –  रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ ट्रेन सवारी करके सजनी, देख रही रस्ते भर सपने। आस-पास की सुंदरता भी, कभी नहीं लगती है अपने।। पिया मिलन की…

रजिस्ट्रेशन के नाम पर सौदा? – ओम प्रकाश

रजिस्ट्रेशन के नाम पर सौदा? सम्मान के बदले भुगतान? पुरष्कार खरीद रहे हैं आप? कहाँ है आपका आत्मसम्मान? काग़ज़ी ट्रॉफियाँ, खरीदे गए मंच, मतलबी तारीफ़ों के साथ गुरु नहीं, ग्राहक…

कोहरा – उल्लाला छंद गीत – राम किशोर पाठक

कोहरा – उल्लाला छंद गीत – राम किशोर पाठक सभी लोग हैं काँपते, सर्दी सबको खल रही। फैल गया है कोहरा, दृष्टि सभी की छल रही।। मुश्किल होता देखना, आस-पास…