पद्यपंकज Bhawna,sandeshparak,Shakshanik मन की वीणा के तार कसे-मनु कुमारी

मन की वीणा के तार कसे-मनु कुमारी


Manu Raman Chetna

लेख सुनें तैयार

मन की वीणा के तार कसे,

अब नए सुरों की बात करें।
डर और संशय दूर हटाएँ,
खुद पर फिर विश्वास करें।

सपनों को फिर जागृत करें,
हिम्मत को फिर साथ लें।
जो भीतर सोया साहस है,
उसे जगाकर हाथ लें।

हर मुश्किल को सीख समझें,
हर आँसू को शक्ति बनाएं।
टूटे मन को जोड़-जोड़ कर,
जीवन का संगीत सजाएं।

सूखी धरती जैसे तरसे,
वैसे मन भी प्यासा है।
आशा की एक बूंद पड़े तो,
फिर से हरा-भरा सा है।

मन की वीणा के तार कसे,
अब रुकना हमको मान नहीं,
जो ठान लिया, कर के रहेंगे —
हम कमजोर इंसान नहीं।

खुद अपना दीपक बन जाएँ,
अंधेरों से क्या घबराना।
ऐसा काम करें जीवन में,
जिसे समय न सके मिटाना।

स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका

प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर
सुपौल, बिहार

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