भविष्य का भारत: संस्कारयुक्त राष्ट्रनिर्माण – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर केवल आधुनिकता की अंधी दौड़ में, शिक्षा अपनी दिशा खो रही[...]
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रे पथ के पथिक! तू अबाध गति से चल – गौरव कुमार तिवारीरे पथ के पथिक! तू अबाध गति से चल – गौरव कुमार तिवारी
रे पथ के पथिक! तू अबाध गति से चल – गौरव कुमार तिवारी, रे पथ के पथिक! तू अबाध[...]
धरती से नाता टूटा है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’धरती से नाता टूटा है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
धरती से नाता टूटा है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ शुभ दर्शन केवल कागज पर, धरती से नाता टूटा है।[...]
पाषाण में परमात्मा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरपाषाण में परमात्मा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
पाषाण में परमात्मा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर जब गोकुल पर मँडराया संकट, इंद्र का कोप अपार था, तब श्रीकृष्ण ने[...]
ध्वनि एक, अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरध्वनि एक, अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
ध्वनि एक, अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर सुनने और पढ़ने में जो, लगते एक समान। पर अर्थों की दृष्टि[...]
अपना मंच, अपना सम्मान – शिवेन्द्र प्रकाश सुमनअपना मंच, अपना सम्मान – शिवेन्द्र प्रकाश सुमन
अपना मंच, अपना सम्मान – शिवेन्द्र प्रकाश सुमन दूजे मंच पर रचना छाए, चेहरे पर मुस्कान, अपने मंच पर छपे[...]
अविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरअविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
‘अविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर थक चुका है यह तन, पर सांस अभी विस्मित है, हर पग पर मिल रही,[...]
काव्य-मुहावरा मंजरी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरकाव्य-मुहावरा मंजरी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
काव्य-मुहावरा मंजरी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर यहाँ हिंदी के कुछ प्रसिद्ध मुहावरों और लोकोक्तियों को काव्य (कविता) के रूप में[...]
स्वाभिमान, सत्य और सेवा का संकल्प – कार्तिक कुमारस्वाभिमान, सत्य और सेवा का संकल्प – कार्तिक कुमार
स्वाभिमान, सत्य और सेवा का संकल्प – कार्तिक कुमार सत्य राह का पथिक हूं मैं सत्य की राह का पथिक[...]
शाश्वत नियम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरशाश्वत नियम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
शाश्वत नियम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर शिखर पर बैठ ओ पथिक! तनिक तू किसपे इतराता? बनाकर काँच के भवनों को,[...]
