नारी का अपमान मनहरण घनाक्षरी छंद लंकापति रावण का यश बल धन गया, किया अपमान जब, जनक दुलारी का। कौरवों ने द्रौपदी की चीर का हरण किया, अबला लाचार जान,…
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प्यारे चांद -डॉ स्नेहलता द्विवेदी
प्यारे-चाँद ओ चाँद उतर मेरे अँगना, मैं तो बैठी संग है बहना। जा ढूंढ के ला मेरा सजना, न उतरे तो फिर ना कहना। यह पूनम बहुत निराली है, है…
दिल की बात सुनें -अमरनाथ त्रिवेदी
दिल की बात सुनें किसी से कुछ कहे न कहें , पर दिल की बात जरूर सुन लें । वह कहता है तो भले के लिए , बात उसकी जरूर गुन लें । आत्मा…
बचपन – बाल गीत – राम किशोर पाठक
बच्चे मिलकर जश्न मनाए। धमा चौकड़ी धूम मचाए।। अनुपम हर क्षण है जीवन का। सफर सुहाना है बचपन का।। हरपल प्यारा सबका न्यारा। लेकर खुशियों की यह धारा।।…
कैकेई का त्याग- विधाता छंद गीत -रामकिशोर पाठक
कैकेई का त्याग- विधाता छंद गीत जगत कल्याण के कारण, किया विष पान त्रिपुरारी। पुनः दुनिया बचाने को, किया है त्याग हित नारी।। निभायी राष्ट्र से नाता, लुटायी स्वप्न थी…
ज्ञान का दीपक
ज्ञान का दीपक 5 अक्टूबर 2025 से विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर कार्तिक कुमार मध्य विद्यालय कटरमाला गोरोल वैशाली 7004318121 ज्ञान दीप जब जलता है, अंधकार मिट जाता…
कष्ट – बैकुंठ बिहारी
कष्टबाल्यावस्था से ही यह माया,किशोरावस्था में भी, न छोड़ती किसी की काया,कभी कुछ खोने का कष्ट,कभी कुछ छूटने का कष्ट,कष्ट का है यह मायाजाल,सुख सुविधा का भी ऐसा ही मायाजाल,जिसे…
उलझन – राम किशोर पाठक
उलझन- गीत सारी सुविधा भरी पड़ी है, पर मिलता आराम नहीं।बहुत दिनों से घरवालों का, आया है पैगाम नही।। रोजी रोटी के चक्कर में, घर जाना जैसे छूट गया।अपनों की…
जीवन सुंदर सरस – महामंगला छंद गीत, राम किशोर पाठक
जीवन सुंदर सरस, लगता हरपल खास। कर्म करे जो सतत, होता नहीं उदास।। हारा मन कब सफल, मन के जीते जीत। जो लेता है समझ, बदले जग की रीत।। जीत…
शरद पूर्णिमा, रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
विधाता छंदधारित मुक्तक शरद पूर्णिमा कहीं संगम कहीं तीरथ, धरा पर पुण्य बहते हैं, मगर जो आज देखेंगे, कहेंगे व्यर्थ कहते हैं। जहाॅं शंकर छुपा कर तन, किए श्रृंगार गोपी…