संस्कृतम् अहं पठामि भाषायाम् जननी अहं नमामि। सखे! संस्कृतम् अहं पठामि।। ज्ञानं वा विज्ञानं वा सर्वे इव धार्यते। मानवोत्थानाय सुकृतं इव कार्यते।। उत्थानाय सर्वेषां इव अनुसरामि। सखे! संस्कृतम् अहं पठामि।।…
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सहज धरा को स्वर्ग बनाएँ – अंजनेय छंद गीतिका – राम किशोर पाठक
सहज धरा को स्वर्ग बनाएँ – अंजनेय छंद गीतिका आओ मिलकर देश सजाएँ। जन-मानस को पाठ पढाएँ।। सभी भेद का त्याग करें हम। सबको सबसे गले लगाएँ।। होड़ मची बस…
तू हीं जग के मालिक – अमरनाथ त्रिवेदी
तू ही जग के मालिक तू ही जग के नैया , तुम्हीं हो खेवैया । तुम्हीं जग के मालिक , तुम्हीं रास रचैया ।। मेरे प्राण भी तुम्ही हो , शक्ति…
विवेकानंद – अहीर छंद – राम किशोर पाठक
विवेकानंद – अहीर छंद मानव का निज धर्म । किए सदा शुचि कर्म।। लिए अलौकिक ज्ञान। दिए अलग पहचान।। अद्भुत बुद्धि विवेक। विवेकानंद नेक।। सपने लिए अनेक। करना भारत एक।।…
वर्षा और जन-जीवन – अमरनाथ त्रिवेदी
वर्षा और जनजीवन वर्षा ही देती हम सबकी पहचान । इसके बगैर निकल रही सबकी जान ।। बिन वर्षा के सब बेहाल । सूखे हैं सब पोखर ताल । वर्षा…
जल बूँदों के संग में – मुक्तामणि छंद गीत- राम किशोर पाठक
जल बूँदों के संग में – मुक्तामणि छंद गीत वर्षा आती देखकर, झूम उठे हैं सारे। जल बूँदों के संग में, जीवन राह निहारे।। झुलस गयी धरती लगी, गीत नयी…
प्रेम जहाँ पग-पग मिलता – अमरनाथ त्रिवेदी
प्रेम जहाँ पग-पग मिलता देश हमारा सबसे न्यारा , लगता कितना प्यारा है ! जग के सारे देशों से , इसे प्रभु ने अधिक सँवारा है ! जग के …
माँ तुम कितनी अच्छी हो – नीतू रानी
माँ तुम कितनी अच्छी हो। माँ माँ तुम कितनी अच्छी हो सब कुछ मेरा करती हो, जब मैं गंदा होता हूँ मुझे रोज स्नान कराती हो। माँ तुम कितनी ——–२।…
अब सुबह हुई जागो- स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
अब सुबह हुई जागो क्या ऐसी सुबह होगी, जब दोष शमन होगा? इस रात का अंधियारा,जब जड़ से खतम होगा, घर घर की इक बाला, बालक भी सम होगा। क्या…
जगन्नाथपुरी रथयात्रा – राम किशोर पाठक
जगन्नाथपुरी रथ-यात्रा- दोहें उत्कल प्रदेश में चलें, जहाँ ईश का धाम। शंख- क्षेत्र, श्रीक्षेत्र है, उसी पुरी का नाम।।०१।। युगल मूर्ति प्रतीक बने, बसे यहाँ अभिराम। श्री जगन्नाथ पूर्ण हैं,…