हिंदी मेरी जुबान हिंदी मेरी पहचान, कभी भावनाओं के ज्वार थामे, कभी जज्बातों को दे पहचान। हिंदी मेरी[...]
Category: Bhawna
किसने रोका है – गिरीन्द्र मोहन झाकिसने रोका है – गिरीन्द्र मोहन झा
अंधेरा घोर घना है, एक बत्ती जलाने से किसने रोका है? प्रदूषण है यदि बहुत अधिक, एक पेड़ लगाने से[...]
मेरी अभिलाषा – डॉ स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’मेरी अभिलाषा – डॉ स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
अभिलाषा अहर्निश है मेरी संताप हरने की। जीवन में सत्य सुन्दर और अतुलित प्राण भरने की। समर्पित इस धरा को[...]
करें इन्हें शत् शत् प्रणाम – नीतू रानीकरें इन्हें शत् शत् प्रणाम – नीतू रानी
शिक्षक के प्रति एक अहसास, शिक्षक दिवस को बनाएँ खास। गुरु बिनु ज्ञान न उपजै , गुरु बिनु मिलै न[...]
गुरु माना है हम आपको- अभिनव कुमारगुरु माना है हम आपको- अभिनव कुमार
जीवन तो समंदर की लहरों में रहता था, और मैं कश्ती लिए किनारे किनारे बहता था। बस सुनता था[...]
सम्मान – भवानंद सिंहसम्मान – भवानंद सिंह
शिक्षक हूँ, बस मान चाहिए। थोड़ा- सा सम्मान चाहिए।। कोरा कागज हो, या हो पानी उसमें रंग मैं भरता हूँ।[...]
सूरज भैया – अवनीश कुमारसूरज भैया – अवनीश कुमार
सूरज भैया सूरज भैया क्यों है तुम्हारे गाल लाल क्या मम्मी ने तुम्हें डाँटा है या पापा ने मारा[...]
दूर तक चलते हुए -शिल्पीदूर तक चलते हुए -शिल्पी
घर की ओर लौटता आदमी होता नहीं कभी खाली हाथ हथेलियों की लकीरों संग लौटती हैं अक्सर उसके अभिलाषाएं, उम्मीद,[...]
