शिक्षक हूँ, बस मान चाहिए। थोड़ा- सा सम्मान चाहिए।। कोरा कागज हो, या हो पानी उसमें रंग मैं भरता हूँ।[...]
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सूरज भैया – अवनीश कुमारसूरज भैया – अवनीश कुमार
सूरज भैया सूरज भैया क्यों है तुम्हारे गाल लाल क्या मम्मी ने तुम्हें डाँटा है या पापा ने मारा[...]
दूर तक चलते हुए -शिल्पीदूर तक चलते हुए -शिल्पी
घर की ओर लौटता आदमी होता नहीं कभी खाली हाथ हथेलियों की लकीरों संग लौटती हैं अक्सर उसके अभिलाषाएं, उम्मीद,[...]
हाँ ठीक हूँ मैं – डॉ. स्वराक्षी स्वराहाँ ठीक हूँ मैं – डॉ. स्वराक्षी स्वरा
यदि श्रृंगार के पीछे दर्द छुपा कर जीना ही ठीक होना होता है तो, हाँ, ठीक हूँ मैं। यदि[...]
एक शिक्षक- पुष्पा प्रसादएक शिक्षक- पुष्पा प्रसाद
एक शिक्षक अपनी पूरी जिंदगी बच्चो के साथ बिताते हैं। खुद सड़क की तरह एक जगह रखते है पर विद्यार्थी[...]
मृत्यु -गिरीन्द्र मोहन झामृत्यु -गिरीन्द्र मोहन झा
मृत्यु अटल है, शरीर की, मरण असम्भव, जमीर की, मृत्यु यदि मिले सुमृत्यु तो, देश हित, लोक हित में हो,[...]
मेरा गॉंव – कुमकुम कुमारी “काव्याकृतिमेरा गॉंव – कुमकुम कुमारी “काव्याकृति
आइए मेरे गाँव में, अजी बैठिए छांव में, प्रकृति के नजारे को, समीप से देखिए। समृद्ध खलिहान है, मेहनती किसान[...]
