क्या से क्या हो गया, वक्त यू क्यू बदल गया। इंसान की पहचान खो गई, इंसान के व्यवहार से इंसान[...]
Category: Bhawna
प्रभाती पुष्प- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रभाती पुष्प- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी ****** लाखों मनुहार करें, कितना भी प्यार करें, पिंजरे में बंद पक्षी खुश नहीं दिखता । समय प्रभात[...]
लेखन मेरे लिये वरदान- कंचन प्रभालेखन मेरे लिये वरदान- कंचन प्रभा
मैं अभिशाप थी इस धरती पर जैसे कोई शाप थी इस धरती पर, भीड़ भरी दुनिया में मैं गुमनाम बन[...]
पत्नी- जयकृष्ण पासवानपत्नी- जयकृष्ण पासवान
पत्नी एक एहसास है , पत्नी तो खुदा की इबादत है। पत्नी घर का श्रृंगार है, पत्नी तो दुर्गा और[...]
नारी शक्ति -जयकृष्ण पासवाननारी शक्ति -जयकृष्ण पासवान
चंडी की अवतार तू अबला, जग है तेरे रखवाले। रुप धारण की आन पड़ी है, अब तेरे किस्मत उजियारे।। “धधक[...]
मेरा शहर दरभंगा – कंचन प्रभामेरा शहर दरभंगा – कंचन प्रभा
ये शहर था जो कभी ख्वाबों का विशाल महलों के नवाबो का कैसी आज ये घनघोर घटा है धरा पर[...]
दीपावली- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’दीपावली- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी ****** जगमग दीप जले, चाँद सा भवन खिले, घर-घर लगी आज हैं बल्बों की लड़ियां। उमंग में जग[...]
चलो एक दीप जलाएं – विवेक कुमारचलो एक दीप जलाएं – विवेक कुमार
चलो आज करें शुरुआत, निराशाओं को देकर मात, मन के मैल को हटाएं, तम को मन से दूर भगाएं, जीवन[...]
बौनी उड़ान – कंचन प्रभाबौनी उड़ान – कंचन प्रभा
ये उड़ान अभी बौनी है मुझे ऊपर बहुत ही जाना है। ये थकान अभी थोड़ी है मुझे अन्त समय तक[...]
शब्दों के बंधन -कंचन प्रभाशब्दों के बंधन -कंचन प्रभा
समन्दर से दूर जा के कभी शंख नही मिलते बंधन से एहसासों को कभी पंख नही मिलते अपने एहसासों मे[...]
