मुनि से शापित ये सुकोमल सी नारी, हो गई उपेक्षित अहल्या बेचारी। महा तपस्विनी थी विदुषी जो नारी, क्यों बन[...]
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पर-हित चिंतन-राम किशोर पाठकपर-हित चिंतन-राम किशोर पाठक
पर-हित चिंतन- दोहा छंद गीत पर-हित चिंतन में सदा, रहते हैं जो लीन। ईश्वर की उनपर कृपा, रहती नित्य नवीन।।[...]
मुझे मत मारो न पापा..अवनीश कुमारमुझे मत मारो न पापा..अवनीश कुमार
मुझ प्यारी बिटिया के लिए लोरी बनाओ न पापा।धीमे सुरों में मुझे सुलाओ न पापा,अपनी बाहों में भरकर झूला झुलाओ[...]
हे हरि क्लेश हरो -रामपाल प्रसाद सिंहहे हरि क्लेश हरो -रामपाल प्रसाद सिंह
हे हरि! क्लेश हरो। विधा गीत। मेरे पीछे पड़ा जगत है,कर दो मालिक मदद जरा। सूख रहे जीवन उपवन को,हे[...]
माता की आराधना – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’माता की आराधना – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
दुर्गा मांँ के मंदिर में, जलता अखंड ज्योति, आओ सब मिल करें, माता की आराधना। नैवेद्य कर्पूर धूप, चंदन अक्षत[...]
शहर की चीख – अवनीश कुमारशहर की चीख – अवनीश कुमार
धक्के खाते लोग, दर-दर भटकते लोग, जहरीली हवा निगलते लोग, सपनों को रौंदते–कुचलते, एक-दूसरे से आगे निकल जाने की चाह[...]
यह चिड़िया कहाँ रहेगी – संजय कुमारयह चिड़िया कहाँ रहेगी – संजय कुमार
बोलो अब मैं कहाँ रहूँगी बच्चे मेरे कहाँ रहेंगें आती है हम सब से कहने अपनी चीं चीं मधुर आवाज[...]
सुन री दीया – अवनीश कुमारसुन री दीया – अवनीश कुमार
सुन री दीया काश! तू सुन पाती, मेरी विरह-व्यथा समझ पाती। तेरी जलती लौ से, क्या-क्या अनुमान लगाऊं? मद्धिम पड़ती[...]
आम आदमी का अंदाज – हरिपद छंद – राम किशोर पाठकआम आदमी का अंदाज – हरिपद छंद – राम किशोर पाठक
आम आदमी का अंदाज – हरिपद छंद आज आदमी आम हो गया, नहीं रहा कुछ खास। बदल रहे अंदाज सभी[...]
माँ के जाने के बाद – नीतू रानीमाँ के जाने के बाद – नीतू रानी
विषय -पापा माँ के जाने के बाद पापा, तुम्हीं मेरे जीवन आधार पापा———-। माँ के जाने—————२। तुम्हीं मेरे माता-पिता तुम्हीं[...]
