Category: padyapankaj

Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.

Jainendra

मनहरण घनाक्षरी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मनहरण घनाक्षरी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 8:13 pm

छंद:- मनहरण घनाक्षरी नदी बीच बिना चीर कभी ना नहाना नीर, सबक सिखाते हमें, सांवला सांवरिया। प्यार को जगाने हेतु[...]

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Jainendra

शरणागत की रक्षा – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’शरणागत की रक्षा – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 10:10 pm

प्रभाती पुष्प जलहरण घनाक्षरी छंद बक्सर में ऋषियों के यज्ञ को सफल किया, अनुज लखन संग, ताड़का को मार कर।[...]

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S K punam

पति को विश्वास है- एस.के.पूनमपति को विश्वास है- एस.के.पूनम

0 Comments 9:30 pm

🙏ऊँ कृष्णाय नमः🙏 हास्यरस(मनहरण घनाक्षरी) कह रही धर्मपत्नी, रहने को मौन ठानी, ऐसी मिथ्या धरा पर,पात्र परिहास है। संगिनी बेलन[...]

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Jainendra

मनहरण घनाक्षरी छंद में – जैनेन्द्र प्रसाद रविमनहरण घनाक्षरी छंद में – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 9:24 pm

प्रभाती पुष्प मनहरण घनाक्षरी छंद में पति व पत्नी के बीच नहीं करें कोई जिच, हमेशा बना कर रखें, आपस[...]

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Jainendra

गिरगिट भी शर्माए – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’गिरगिट भी शर्माए – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 10:00 pm

सुबह में किस दल रात में जाएं बदल, नेताओं के रंग देख, गिरगिट भी शर्माए। चुनाव के समय में नए-नए[...]

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S K punam

जन मन सकुशल- एस.के.पूनमजन मन सकुशल- एस.के.पूनम

0 Comments 9:52 pm

🙏ऊँ कृष्णाय नमः🙏 विधा:-जलहरण घनाक्षरी (जन मन सकुशल) रमजान का महीना, पाक है मक्का मदीना, सेवा भाव सिलसिला,सदियों से है[...]

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S K punam

जलहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनमजलहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनम

0 Comments 8:44 pm

🙏ऊँ कृष्णाय नमः🙏 विधा:-जलहरण घनाक्षरी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, करें शुभ कार्य सदा, सनातन परंपरा,है सदियों से अचल। नूतन विचार आए,[...]

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Manu Raman Chetna

दोहा (मां)- मनु रमण चेतनादोहा (मां)- मनु रमण चेतना

0 Comments 10:20 pm

मां की छवि को देखकर,आए जिय में जान। उनसे बढ़कर कुछ नहीं, वह होती भगवान।। मनसा अन्तर सेवतीं, वचसा कर[...]

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S K punam

मनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनममनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनम

0 Comments 10:15 pm

मनहरण घनाक्षरी तप गई आज धरा, धूल संग चली हवा बढ़ गई गर्मी धूप,घर में छुप जाए। प्रातःकाल उठ कर,[...]

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