Category: padyapankaj

Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.

Asmita

हमें किताब चाहिए- स्मिता ठाकुरहमें किताब चाहिए- स्मिता ठाकुर

0 Comments 2:59 pm

सुन लो सर जी,सुन लो मैडम ना खाना चाहिए ना पोशाक चाहिए… बस समय से हमको किताब चाहिए।। अप्रैल से[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Dhiraj

चलना है थोड़े -थोड़े- धीरज कुमारचलना है थोड़े -थोड़े- धीरज कुमार

0 Comments 2:58 pm

हैं पग- पग पर रोड़े। चलते रहना है थोड़े -थोड़े।। बढ़ते कदम अब रुकने वाले नहीं है। इरादे मजबूत रखे[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
M S HUSSAIN

मैं बिहार हूं- एम० एस० हुसैनमैं बिहार हूं- एम० एस० हुसैन

0 Comments 7:09 pm

बाल्मीकि का मैं रामायण हूं एस० एच० बिहारी मैं गायन हूं बहादुर और बिस्मिल्लाह की वाद्य यंत्रों का सदा मैं[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

भारत का गौरव बिहार- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’भारत का गौरव बिहार- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 6:34 pm

जो गौतम की है तपोभूमि, जिसे महावीर का मिला प्यार, वह भारत का गौरव बिहार।। कोसी, फल्गु, बूढ़ी गंडक, इस[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jaykrishna

बिहार गीत – जयकृष्णा पासवानबिहार गीत – जयकृष्णा पासवान

0 Comments 10:29 am

उठो-उठो होलैय बिहान गे बहिना । हमरो बिहार छै महान…२।। “गांधी जी के कर्म भूमि” कुंवर सिंह के वीरता।२ “धर्म[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

चारो फल पाइए- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’चारो फल पाइए- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 11:43 am

प्रभाती पुष्प 🌹🙏🌹🙏🌹🙏 मनहरण घनाक्षरी छंद भोलेनाथ अंतर्यामी, तीनों लोकों के है स्वामी, लंबोदर माता शिवा-शरण में आइए। भांग-भस्म, कंदमूल,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
S K punam

मनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनममनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनम

0 Comments 7:51 pm

🙏कृष्णाय नमः🙏 विद्या:-मनहरण घनाक्षरी 🌹कविता सुनाइके🌹 काव्य पथ पर चला, शब्द जोड़-जोड़ कर, प्रेम गीता लिख दिया,शब्दों को सजाइके। विचारों[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Manoj

जय होगी- मनोज कुमार दुबेजय होगी- मनोज कुमार दुबे

0 Comments 6:58 pm

आज नही तो कल तुम्हारी ही जय होगी भाग्य नही केवल मेहनत से ही तय होगी अंधकार का नाश प्रकाश[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

रूप घनाक्षरी छंद- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’रूप घनाक्षरी छंद- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:30 pm

गुरू को समर्पित बागानों में फल-फूल, खेतों बीच कंद-मूल, सुमन को बसंत में, ‘रवि’ महकाता कौन! सूरज कहां से आता[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें