समाज की बलि नित्य बनती है औरत, क्या समाप्त हो गई हमें इसकी जरूरत? श्रद्धा से प्रेरणा पा मनु को आई जागृति, नारी समाज के दामन से जुड़ी भारत की…
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Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.
पावन होली आई है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
विधा: गीत(१६-१४) आओ स्नेहिल रंग उड़ाओ, पावन होली आई है। बच्चे बूढ़े नर- नारी पर, कैसी मस्ती छाई है।। सुंदर है बच्चों की टोली, सबके कर पिचकारी है। गली- गली…
होली तेरे संग चले -मनोज कुमार
होली तेरे संग चले हर एक कली जब बोल उठे, मादक मंजर रस टपके, कोयल कूके तन तरसे, बाग की पक्षी चहक उठे, मन मोर दीवानी मचल कहे, चल छोड़…
चंचल वन में मनी है होली-निधि चौधरी
एक बाल कविता होली आई होली आई, चंचल वन की टोली आई। शेर, जिराफ,लोमड़ी, सियार, सभी को भाया है त्योहार। बिल्ली मौसी ने तलें है पुए, पीछे पड़े है उनके…
गुरु को नमन-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
पूरब में देख लाली, झूमती है डाली डाली, धरती आबाद होती, सूरज किरण से। बसंत बहार देख, फूलों की कतार देख, तितली ऋंगार कर, पूछती मदन से। जंगलों में कंद-मूल,…
रास छंद- सुधीर कुमार
प्यारे बच्चों , तुम सब मिलकर , अब रहना । इस जीवन में , उत्तम विद्या , ही पढ़ना ।। सही कर्म में , रोज लगाना , तुम मन को…
शिष्टाचार -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद सामाजिक रिवाजों से, कट रहे युवा पीढ़ी, शिष्टाचार – व्यवहार, दिखते न वाणी में। सत्य का महल सदा, टिकता है दुनिया में। कागज की नाव कभी, चलती…
बगिया की उदासी- संजय कुमार
आज बगिया क्यों उदास है, बोलो मेरे पापाजी। कल तक कितनी चहल पहल थी गुलजार तुम्हारी बगिया थी। माँ खुश थी, भैया खुश थे ताई खुश थे, ताऊ खुश थे।…
क्यूँ हम भूल जाते हैं-भोला प्रसाद शर्मा
जब हम माँ के गर्भ में होते हैं मुझे बहुत सुखों की अनुभूति होती है कुछ ही दिनों में हमें अपने खून पसीने से सीच कर बड़ा कर दिया जाता…
प्रेम अनुराग -जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद बसंत बहार ले के, रंगों का त्योहार आया, जगदंबा माता संग, शिव खेलें फाग है। सिर पर जटा जूट, हाथ लिए कालकूट, बने जब नीलकंठ, गले पड़ा…